डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम ने जेल में रहते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। वहीं बाबा का एक ऐसा सच सामने आया, यकीं नहीं होगा।
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राम रहीम के साथ हनीप्रीत
दरअसल, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या की हत्या मामले में अहम गवाह खट्टा सिंह के बयान का क्रॉस एग्जामिनेशन पूरा हो गया। विशेष सीबीआई की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान पूर्व डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के मामले में भी क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू हो गया। रंजीत हत्या मामले में खट्टा सिंह अपने पहले के बयान पर कायम रहते हुए इस मामले में भी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को हत्या का आरोपी बताया।
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ram rahim
खट्टा सिंह ने बताया कि डेरा प्रमुख को लगता था कि साध्वियों के यौन शोषण के पत्र जगह-जगह भेजने के पीछे डेरा मैनेजर का हाथ है। इसके बाद डेरा प्रमुख ने सिरसा डेरा की गुफा में एक बैठक की। इसमें हत्या मामले में आरोपी कृष्ण लाल, अवतार सिंह, दर्शन सिंह, इंद्रसेन, जसवीर सिंह एवं सबदिल मौजूद रहे। 10 जुलाई, 2003 को रंजीत सिंह की हत्या करवा दी गई। अदालत ने दोनों मामलों में सुनवाई लिए एक जून की तारीख मुकर्रर की है।
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राम रहीम के साथ हनीप्रीत
अगली तारीख पर रामचंद्र हत्या मामले के आरोपियों के बयान सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज किए जाएंगे। दूसरी ओर, राम रहीम ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए सीबीआई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया कि सीबीआई ने कुल 128 गवाहों के बयान दर्ज किए थे। इनमें से 122 उसके पक्ष में थे जबकि 6 विरोध में। सीबीआई ने केवल 6 गवाहों के बयान ऑन रिकार्ड रखे हैं जिन्होंने उसके खिलाफ बयान दिए थे, जबकि 122 गवाहों के बयान को रिकार्ड पर ही नहीं लाया गया।
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Ram Rahim
ऐसे में सभी 122 गवाहों के बयान को रिकार्ड का हिस्सा बनाने की अपील की गई। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए डेरा का पक्ष सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। डेरा प्रमुख राम रहीम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में जब सीबीआई जांच की तो सीबीआई ने 128 लोगों को मामले में गवाही के लिये बुलाया था। लेकिन जब सीबीआई ने जब चार्जशीट फाइल की तो 122 गवाह जिन्होंने उस के पक्ष में बयान दिए थे उनकी गवाही सीबीआई ने कोर्ट में पेश नहीं की।
जिन छह लोगों ने राम रहीम के खिलाफ गवाही दी थी केवल उन गवाही को कोर्ट के रिकॉर्ड में लाया गया। इस बाबत राम रहीम ने सीबीआई कोर्ट पंचकूला में भी एक अर्जी दायर कर उसके पक्ष 122 की गवाही को कोर्ट रिकॉर्ड में लाने की मांग की थी लेकिन सीबीआई कोर्ट पंचकूला ने उसकी मांग खारिज कर दी थी। सीबीआई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। सोमवार को लगभग 1 घंटे की बहस के बाद हाई कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।