श्रीनगर के पंपोर में आतंकी हमले में शहीद हवलदार जगतार सिंह के पिता आंखों में आंसू लिए बोले मुझे बेटे की शहादत पर गर्व है। दरअसल श्रीनगर के पंपोर में आतंकी हमले में शहीद हुए आठ सीआरपीएफ के जवानों में से एक हवलदार जगतार सिंह पंजाब के रोपड़ जिले के गांव बुर्जवाला के थे। उनके पिता सुदागर सिंह को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। जगतार सिंह का पार्थिव शरीर रविवार की देर रात या सोमवार को पैतृक गांव पहुंचने की उम्मीद है।
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आतंकी हमले में शहीद हवलदार जगतार सिंह के परिजन
- फोटो : amar ujala
हवलदार जगतार सिंह सीआरपीएफ में ड्राइवर थे और हमले का शिकार हुई बस को जगतार सिंह ही चला रहा थे। जगतार सिंह की शहादत से बाद गांव बुर्जवाला समेत इलाके में शोक का माहौल है। शहीद की पत्नी हरनीप कौर और मां महिंदर कौर का रो-रो कर बुरा हाल है। जगतार सिंह के दो बच्चे हैं। बेटी जशनप्रीत कौर (16) 11वीं कक्षा और बेटा गुरमनवीर सिंह (9) पांचवीं कक्षा में पढ़ते हैं। शहीद जगतार सिंह के पिता सुदागर सिंह ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है।
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आतंकी हमले में शहीद हवलदार जगतार सिंह के परिजन
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उन्होंने बताया कि उनके तीन बेटे है। जगतार सिंह घर में सबसे छोटा होने के कारण परिवार का लाडला था। उन्होंने बताया बेटे जगतार सिंह ने गांव मीयांपुर के सरकारी स्कूल में दसवीं की पढ़ाई की और वर्ष 1994 में वह सीआरपीएफ में भर्ती हुए। जगतार सिंह पिछले आठ वर्ष से श्री नगर में तैनात थे। आतंकी हमले का शिकार होने वाली बस को भी जगतार सिंह ही चला रहे थे।
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आतंकी हमले में शहीद हवलदार जगतार सिंह के परिजन
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शहीद जवान के परिवार में देश की सेवा करने का जज्बा परिवार की पृष्ठभूमि से ही मिला है। जगतार सिंह के चाचा सूबेदार प्रेम सिंह और सरदार सिंह ताया चाचा फौज में सेवा कर चुके हैं। उसके दोनों भाई पवित्र सिंह व निर्मल सिंह भी डिफेंस में सेवा कर रहे हैं। शहीद जगतार सिंह की शहादत पर इलाके को गर्व है। निर्मल सिंह ने कहा कि जगतार सिंह दिलेर थे। उन्हें गर्व है वह देश के लिए शहीद हुए। गांव वासी दलबाग सिंह ने कहा कि उन्हें दुख के साथ गर्व है कि जगतार सिंह ने शहीद होकर इलाके का नाम रोशन किया है।
आतंकी हमले में शहीद हवलदार जगतार सिंह के परिजन
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शहीद जवान जगतार सिंह की याद में इलाके में यादगार बनाने की मांग उठने लगी है। गांव के सरपंच हरप्रीत सिंह, गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान दलबाग सिंह व गांव वासी शमशेर सिंह ने कहा कि शहीद की याद में इलाके में कोई यादगार बननी चाहिए। इन्होंने कहा कि गांव में शहीद की याद में कोई यादगारी गेट बनवा दिया जाए या सड़क का नाम शहीद के नाम पर रख देना चाहिए। इन्होंने कहा कि अगर शहीद को सम्मान दिया जाए तो नौजवानों में फौज में भर्ती होकर देश के लिए सेवा करने का जज्बा पैदा होगा। जिला प्रशासन शहीद जवान जगतार के परिवार को सम्मानित करने की बात कर रहा है, पर दुख की इस घड़ी में परिवार को हौसला देने के लिए कोई भी अधिकारी या राजनेता गांव नहीं पहुंचा।