मिलिए दुनिया की सबसे उम्रदराज मां से, जिसने 66 साल की उम्र में एक साथ तीन बच्चों को जन्म देकर सभी को चौंका दिया था। हिसार की रहने वाली इस 72 वर्षीय महिला का नाम भतेरी देवी है और उसने शादी के 44 साल बाद 66 की उम्र में एक साथ तीन बच्चे पैदा किए थे, वो भी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन(आईवीएफ) तकनीक के सहारे। ये मामला भले ही 6 साल पुराना है लेकिन इसने एक रिकॉर्ड बनाया था। डॉक्टरों के मुताबिक आज भी ये रिकॉर्ड कायम है। दरअसल ये मामला तब शुरू हुआ जब पहली पत्नी को बांझ मान पति ने बच्चे की चाहत में दूसरी और फिर तीसरी शादी कर ली, लेकिन बच्चा न हुआ। हारकर वो फिर से पहली पत्नी के पास लौटा तो ढलती उम्र में उसने एक साथ तीन बच्चे पैदा कर सभी को चौंका दिया।
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देश की सबसे उम्रदराज मां
29 मई 2010 को दो लड़के और एक लड़की को जन्म देने वाली भतेरी देवी की शादी 50 साल पहले हिसार में देवा सिंह के साथ हुई थी। शादी के बाद कई साल तक कोई संतान पैदा नहीं हुई। संतान की चाह में देवा सिंह ने दो और शादियां कीं लेकिन उन दोनों से बच्चा नहीं हुआ। आखिरकार संतान सुख की चाहत हरियाणा के नेशनल फर्टिलिटी सेंटर ने पूरी कर दी। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक की बदौलत 66 साल की उम्र में भतेरी देवी मां बन पाईं। यूरोप और अमेरिका में ये तकनीक काफी कामयाब रही है और इस तकनीक के बारे में डॉक्टरों का कहना है कि इसमें खतरा भी कम रहता है।
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देश की सबसे उम्रदराज मां
आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. अनुराग बिश्नोई ने दावा किया कि 21 मई, 1944 को जन्मीं भतेरी की जन्मतिथि की पुष्टि जन्म प्रमाणपत्र से भी हुई है। इस तरह वह एक साथ तीन बच्चों को जन्म देने वाली दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला बन गई। चिकित्सकों के मुताबिक तीनों बच्चों में से एक का वजन 1.2 किलोग्राम, दूसरे का 1.1 और तीसरे का 800 ग्राम था। जिनमें से एक बेटे की मौत जन्म के कुछ सप्ताह बाद हो गई थी। फिलहाल भतेरी देवी के दोनों बच्चे स्कूल जाते हैं। भतेरी देवी चंडीगढ़ से तीन सौ किलोमीटर दूर रोहतक जिले के सररोद गांव की रहने वाली हैं।
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हालांकि इसके पहले नवंबर 2008 में हिसार में 70 साल की राजो देवी ने इनविट्रो फर्टिलिटी उपचार के बाद एक लड़की को जन्म देकर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी थीं।
वहीं उत्तरप्रदेश निवासी ओमकारी सिंह ने 70 वर्ष की उम्र में 27 जून 2008 को जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। आईवीएफ तकनीक के सहारे मां बनी ओमकारी देवी के दोनों बच्चे जन्म के समय काफी कमजोर थे। इनमें से एक बच्चे की मौत जन्म के चार साल बाद हो गई।