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शहीद की अंतिम विदाई: पत्नी हुई बेहोश तो बेटी ने संभाला, भारत माता की जय से गूंजा शहर

Thu, 27 Apr 2017 09:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
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जवान की आखिरी विदाई में उमड़ा पूरा शहर
किसी शहीद की अंतिम विदाई हो तो ऐसी ही हो। पूरा शहर भारत माता की जय के नारे लगा रहा था। देशभक्ति की मिसाल देखिए
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जवान की आखिरी विदाई में उमड़ा पूरा शहर
सुकमा में शहीद हुए हरियाणा के जवान शहीद राम मेहर संधू का पार्थिव शरीर जब उनके गांव पहुंचा तो वहां का नजारा देखने वाला था। अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। सभी ने शहीद को नम आंखों से अतिम विदाई दी। 
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जवान की आखिरी विदाई में उमड़ा पूरा शहर
सुकमा में शहीद हुए सीआरपीएफ हवलदार राममेहर के गांव खेड़ी मान सिंह में मातम पसरा हुआ है तो वहीं गांव के लोग देश के लिए शहीद होने वाले इस जांबाज की प्रेरक बातों को याद कर रहे हैं।

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सरकार को शहीद याद नहीं!
शोक जताने के लिए पहुंचने वाले नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के हुजूम के बीच गांव का हर युवा बस यही कह रहा था कि काश मैं भी सेना या सीआरपीएफ में होता तो देश पर हमला करने वाले नक्सलियों से लड़ते हुए अपने बड़े भाई की तरह शहीद हो जाता। 
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rammehar's family
शहीद राममेहर गांव के युवाओं के लिए बड़े भाई ही थे, जो छुट्टी पर गांव आने पर युवाओं को सेना या सीआरपीएफ में जाने के लिए प्रेरित करते। इनके प्रेरणा के कारण ही आज गांव के कई युवा सेना में हैं। जिसके कारण इस गांव को जवानों का गांव कहा जाता है।
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इस समय गांव के करीब 30 युवा सेना की तरफ से देश की सुरक्षा में लगे हैं, वहीं अब तक गांव के करीब 100 लोग सेना में भर्ती होकर देश की सुरक्षा कर चुके हैं। इंद्री कस्बे में बसे इस गांव की आबादी करीब 3500 है। आपसी भाईचारे का मिसाल देने वाले इस जाट बहुल गांव में ब्राह्मण के अलावा धोबी, हरिजन, मुस्लिम जैसी कई जातियां रहती हैं।
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rammehar's family
इस गांव के युवाओं में सबसे ज्यादा ललक सेना में जाने को लेकर है। गांव के युवकों के दिन की शुरुआत अलसुबह सेना के ही तरह फिजिकल ट्रेनिंग और दौड़ से शुरू होती है। इसमें सहयोग करते हैं शहीद राममेहर के सबसे छोटे भाई पहलवान रमेश। 

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इस समय गांव के करीब 25 युवा इनके अखाड़े में पहलवानी और सेना में जाने की फिजिकल ट्रेनिंग ले रहे हैं। पांच साल पहले अखाड़ा शुरू करने वाले रमेश बताते हैं कि इस गांव के हर युवा में देशप्रेम का एक अलग जज्बा है। यहां शहीद होने पर लोग गर्व करते हैं। यही कारण है कि हर युवा सेना में जाने के लिए तैयार रहता है। अब तक कई युवा उनके अखाड़े में ट्रेनिंग कर सेना में जा चुके हैं। 

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rammehar's family
रमेश ने कहा कि शहीद राममेहर जब भी गांव में आते थे तो युवाओं को आतंकवादियों और नक्सलियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के किस्से सुनाकर प्रेरित करते थे। यही कारण था कि वे युवाओं में काफी लोकप्रिय थे और गांव का हर युवा सेना में जाना चाहता था।

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rammehar's family
भाई के शहादत पर एक्स आर्मी मैन को गर्व
शहीद रामेहर की शहादत पर बड़े भाई एक्स आर्मी मैन राजकुमार को गर्व है। एक साल पहले आर्मी से रिटायर होकर हरियाणा पुलिस में तैनात राजकुमार ने कहा कि एक न एक दिन मरना तो सभी को है, लेकिन जो देश के लिए मरे उस पर गर्व है।
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राजकुमार ने कहा कि भाई खोने पर दर्द तो होता है, लेकिन भाई के शहीद होने पर गर्व भी है। मुझे जान देकर देश की सेवा करने का मौका नहीं मिला, लेकिन मेरे भाई ने देश की सुरक्षा में अपनी जान की बाजी लगा दी। आज हर कोई उनके शहादत पर गर्व कर रहा है।
 
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