30 अक्टूबर 2014 को अटेली के चंपा देवी सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली करीब दस वर्षीय जिया के घर में चूहों को पकड़ने का पिंजरा लगाया हुआ था। सुबह चूहा फंसने के बाद जिया उसको बाहर छोड़कर आयी। इसके बाद दोबारा घर में पिंजरा लगाया गया। देर शाम फिर पिंजरे में चूहा फंस गया। दरअसल बहुचर्चित अटेली की जिया हत्याकांड में वीरवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है।
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आरोपियों को मिली सजा
कोर्ट ने इस मामले में चौथे आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है। फैसला सुनने के लिए अटेली से वीरवार को काफी लोग कोर्ट पहुंचे थे। फैसला सुनते ही जिया की मां इंदु रो पड़ीं और उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। दूसरी तरफ आरोपी पक्ष का कहना है कि इस फैसले के विरोध में हाईकोर्ट में अपील करेंगे। अटेली में 30 अक्टूबर 2014 की रात रेप कर जिया की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में एक नवंबर 2014 को पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या और दुष्कर्म का केस दर्ज किया था।
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आरोपियों को मिली सजा
इस मामले को लेकर सामाजिक संगठनों ने कई दिनों तक अटेली में आंदोलन किया था। सामाजिक संगठनों के दबाव पर पुलिस ने अरुण पुत्र सुभाष, दीपक पुत्र महेंद्र और राजेश पुत्र रोहताश को तीन नवंबर 2014 को गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन चार नवंबर को पुलिस ने चौथे आरोपी संजय चौधरी पुत्र राजेंद्र चौधरी वासी पटना को भी काबू किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने मामले को दबाने का काफी प्रयास
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आरोपियों को मिली सजा
यह है पूरा घटनाक्रम
30 अक्टूबर 2014 को अटेली के चंपा देवी सरकारी स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली करीब दस वर्षीय जिया के घर में चूहों को पकड़ने का पिंजरा लगाया हुआ था। सुबह चूहा फंसने के बाद जिया उसको बाहर छोड़कर आयी। इसके बाद दोबारा घर में पिंजरा लगाया गया। देर शाम फिर पिंजरे में चूहा फंस गया। मां ने फिर जिया से चूहा बाहर छोड़कर आने को कहा। जिया चूहा बाहर छोड़ने गई तो उस समय अंधेरा होने लगा था।
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आरोपियों को मिली सजा
जिया चूहा छोड़ने के बाद वापस नहीं आई। मां ने पड़ोसियों के साथ खोजबीन की लेकिन जिया का पता नहीं चला। जिया की मां देर रात शिकायत लेकर अटेली थाने पहुंची। इसके बाद सुबह उसका शव दोषी अरुण के प्लाट के पास पड़ा मिला। एक नवंबर 2014 को पुलिस ने जिया की मां की शिकायत पर अज्ञात लोगों खिलाफ नाबालिग के साथ दुष्कर्म और हत्या का केस दर्ज किया था।
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आरोपियों को मिली सजा
36 गवाहों के बयानों के बाद सुनाई सजा
मनीषा चौधरी ने सब इंस्पेक्टर मलखान सिंह को जांच सौंपी और कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ सभी साक्ष्य पेश किए। इसके बाद 36 गवाहों के बयानों और वकीलों की जिरह के बाद वीरवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश डा. रणधीर कुमार डोगरा की अदालत ने अटेली वासी अरुण, राजेश और दीपक तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।
जिया हत्याकांड मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीन दोषियों को 302 के तहत फांसी की सजा सुनाई है। वहीं एक को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया है। यह कोर्ट का एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला है। - कर्ण सिंह यादव, अधिवक्ता
आरोपी पक्ष इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। - अरविंद यादव, अधिवक्ता बचाव पक्ष