पापा, मैं बेटी नहीं, बेटा हूं तुम्हारा, कभी चिंता मत करना। बड़ी बहादुर बेटी थी मेरी, नहीं जानता था ऐसा कदम उठा लेगी। देखिए तस्वीरें।
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दिल्ली की एलएलबी स्टूडेंट्स ने रोहतक में की सुसाइड
- फोटो : अमर उजाला
अपनी बहादुर और समझदार बेटी के शव को देखकर बिलखते हुए पिता उक्त बातें ही बार बार कह रहे थे। जितेंद्र चौहान धीमी आवाज में बिलखते हुए कह रहे थे कि कहां चला गया मेरा बहादुर बेटा। यह बात अपने पिता के सामने हमेशा बोलती थी मौत को गले लगाने वाली कविता। केवल पिता ही नहीं बल्कि चाचा सहित परिवार के दूसरे सदस्य भी कविता मौत की खबर से सदमे जैसी स्थिति में हैं।
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देर शाम तक परिवार के कुछ सदस्यों को उसके दुनिया से चले जाने की जानकारी नहीं दी गई थी। कविता के पिता एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट हैं। एक छोटी बहन और भाई में कविता सबसे बड़ी थी। कविता दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में इन्टर्नशिप की थी। पिता ने बताया कि एक बार उनका किसी के साथ झगड़ा हो गया। इस पर कविता ने कई वकीलों को पैरवी के लिए लाकर खड़ा कर दिया था।
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इन्टर्नशिप के चलते कविता पढ़ाई के अधिकतर समय घर पर रही। परिजनों ने बताया कि परीक्षाओं की तैयारी के लिए कविता 15 सितंबर को दिल्ली से हॉस्टल में शिफ्ट हुई थी। इसके कुछ दिन बाद वह बीमार हो गई। इसके बाद पिता उसे अपने साथ घर ले गये थे। 2 अक्तूबर को ही वह पिता के साथ रोहतक आई थी। उसे हॉस्टल में छोड़कर पिता घर चले गये थे।
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हॉस्टल आने के दो दिन बाद बेटी की मौत की खबर परिजनों के पास पहुंच गई। परिजनों का कहना है कि कविता घर से रोहतक आई थी तो बहुत खुश थी। कविता आत्मघाती कदम भी उठा सकती है इसका तो परिवार के सदस्यों को अंदेशा तक नहीं था। बिलखते हुए पिता ने बेटी की बहादुरी के कई प्रसंग का जिक्र किया। बताया कि कविता की पढ़ाई अभी पूरी नहीं हुई थी।
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इन्टर्नशिप के दौरान कुछ दिन पहले वह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस वीएस ठाकुर के सामने एक केस की पैरवी के लिए गई थी। देश की सर्वोच्च अदालत में बेटी को पैरवी करता देखा पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। कविता हमेशा पिता से वादा करती थी कि वह एक दिन देश की शानदार वकील बनेगी। कविता के दुनिया से चले जाने के बाद पिता के सपने भी खत्म हो गये।
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घर में ही नहीं कविता हॉस्टल में भी अन्य लड़कियों के साथ हंसी-मजाक करती रहती थी। सभी लड़कियों के साथ वह मिलनसार थी। कविता के साथ उसके कमरे में जेबीटी की छात्रा रहती है। इस समय हॉस्टल में करीब 35 लड़कियां रह रही हैं। इनमें अधिकतर पढ़ाई-लिखाई करती हैं।
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गौरतलब है कि रोहतक में कैलाश कालोनी स्थित गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली एलएलबी की छात्रा ने गले में चुन्नी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा के खुदकुशी के कारण का पता नहीं चल सका है। पुलिस को छात्रा के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। परिजन छात्रा को हंसमुख और मिलनसार बता रहे हैं। दो दिन पहले ही छात्रा हॉस्टल में रहने आई थी। घटना के बाद से ही छात्रों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।