दो परिवारों के 10 लोगों का कत्ल करने के बाद कातिल ने जब इतनी हत्याएं करने का मकसद बताया तो पुलिस वालों के होश ही उड़ गए। मामले में आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई है, देखिए उस दरिंदे को।
मामला मोहाली का है। 14 साल पहले जून 2004 में पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में एक ही परिवार के चार सदस्यों की हत्या करने वाले सुहावी गांव निवासी खुशविंदर सिंह उर्फ खुशो को सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। दोषी को पहले भी एक ही परिवार के छह लोगों को मारने में मौत की सजा हो चुकी है। इसमें आरोपी ने अपनी अपील सुप्रीम कोर्ट में डाली हुई है। जज एनएस गिल ने अपने फैसले में लिखा है कि यह अपराध अति घिनौना है। दोषी ने एक साथ परिवार के चार सदस्यों को मौत के घाट उतारा है, जिसमें में दो बच्चे थे, जिन्होंने अभी दुनिया देखनी थी। ऐसे में दोषी पर किसी भी कीमत पर रहम नहीं किया जा सकता।
लगा बीस हजार जुर्माना, जुर्माना न चुकाने एक साल की होगी जेल
सीबीआई की विशेष अदालत ने खुशविंदर को बीस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में दोषी को एक साल और जेल में काटना होगा। अदालत ने उसे धारा 302 हत्या, 364 हत्या की नीयत से किडनैपिंग व 201 सबूतों के तहत सजा सुनाई है। सीबीआई की अदालत पटियाला से मोहाली शिफ्ट होने के बाद यह पहला मामला है, जिसमें किसी दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है। सीबीआई के प्रॅासिक्यूटर कुमार रजत ने कहा कि जज के फैसले की कॉपी हाईकोर्ट भेजी जाएगी। दूसरी तरफ पीड़ित परिवार के मेंबरों ने फैसले पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद उन्हें न्याय मिला।
जज ने एक मिनट में सुनाया फैसला, दोषी के चेहरे पर शिकन तक नहीं
अदालत ने इस मामले में दोपहर बाद फैसला सुनाया। दोषी को पुलिस वाले कड़ी सुरक्षा में अदालत में लेकर गए। जज की तरफ से उसे दोषी पहले ही करार दिया जा चुका था। इसके बाद जज ने एक मिनट में अपना फैसला सुना दिया। इसके बाद दोषी को पुलिस पीछे लेकर चली गई। हालांकि इस दौरान उसके चेहरे पर किसी भी तरह का कोई दुख नहीं था। वह पहले की तरह खामोश था। इस दौरान उसका कोई पारिवारिक सदस्य तक नहीं आया हुआ था। जज ने कहा कि दोषी पर किसी भी कीमत पर रहम नहीं किया जा सकता, उसने एक घिनौना अपराध किया है।
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12 लाख रुपये के लालच में मार डाला था परिवार को
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10 हत्याएं करने वाला खुशविंदर सिंह
फांसी की सजा पाने वाले खुशविंदर ने सभी हत्याएं कबूली हैं। उसने 12 लाख रुपये के लालच में एक परिवार की खुशियां तबाह कर दीं। वह इस परिवार से अच्छी तरह घुला मिला हुआ था। उसे यह बात पता चली कि परिवार के पास जमीन बेचकर 12 लाख रुपये आए हैं। इसी रुपये को पाने के लिए उसने हत्या की साजिश रची। पहले उसने परिवार के सदस्यों को अपनी बातों में फंसा लिया। इसके बाद अलसुबह नहर किनारे बैठकर ख्वाजा की पूजा करने के लिए तैयार किया। उन्हें यह भरोसा दिलाया कि पूजा के बाद रकम दोगुनी हो जाएगी।
आरोपी ने इस दौरान परिवार से 12 लाख रुपये भी लाने को कहा। तय समय के मुताबिक परिवार नहर किनारे पहुंच गया। इसके बाद खुशविंदर ने कुलवंत सिंह (42), पत्नी हरजीत कौर (40), रमनदीप कौर (17) व बेटे अरविंदर(14) को लाइन में बिठा दिया और आंखें बंद करके पूजा करने के लिए कहा। इसी बीच आरोपी ने एक एक करके सभी को नहर में धक्का दे दिया। यह चारों हत्याएं तीन जून 2004 में हुई थीं। इसके बाद मृतक के साले कुलतार सिंह के बयानों पर बस्सी पठाना में पांच जून को केस दर्ज हुआ था।
आंखों पर पट्टी बांधकर नहर में धक्का देता था
सीबीआई के डीएसपी एनआर मिना ने बताया, खुशविंदर सिंह तांत्रिक बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। फिर उन्हें नहर पर ले जाता था और उसके बाद उनकी आंखो पर पट्टी बांध कर किनारे खड़े होकर नमस्कार करने के लिए कहता था। इसके बाद एक-एक कर सभी को धक्का दे देता था।
मां बेटे का नहीं मिला था शव
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। इसके बाद शवों की तलाश शुरू हुई थी। सात जून 2004 को रमनदीप और 9 जून को कुलवंत सिंह का शव नहर से निकाला गया। जबकि हरजीत कौर व उसके बेटे अरविंदर सिंह का शव आज तक बरामद नहीं हुआ।
मृतकों के पैसे से बनाया था घर और की थी शादी
दोषी खुशो का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था। उनके पास गांव सुहावी में करीब चार एकड़ जमीन थी। कुलतार सिंह ने बताया कि दोषी का भाई कुलविंदर उनके पास मुंशी का काम करता था। वह उसकी पूरी सहायता करते थे। वह 2006 में उसकी शादी में भी शामिल हुए थे। बाद में आरोपी ने कबूला था जो 12 लाख उसने उक्त लोगों को मारकर हासिल किए थे। उससे मकान बनाया था। साथ ही शादी पर पैसे खर्च किए थे।
सोचा नहीं था खुशो ही निकलेगा कातिल : शिकायतकर्ता कुलतार सिंह
केस के शिकायतकर्ता कुलतार सिंह का कहना है कि खुशो उनके परिवार का करीबी था। उन्होंने उसकी काफी मदद की। उनका अपना कारोबार है। उनके पास ही दोषी का बड़ा भाई काम करता था जबकि दोषी को फतेहगढ़ साहिब के कोर्ट के बाहर फोटोस्टेट की दुकान खुलवाने में भी मदद की थी। उन्हें उस पर कभी संदेह ही नहीं था कि वह ऐसा भी काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि वह तंदुरुस्त नहीं है। इसके चलते वह अदालत नहीं आ पाए। उन्होंने फैसले का स्वागत किया।
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2007 में बंद कर दिया गया था केस
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10 हत्याएं करने वाला खुशविंदर सिंह
दोषी का बड़ा भाई कुलविंदर मृतका हरजीत कौर के भाई कुलतार सिंह के पास काम करता था। वह मुंशी का काम देखता था। ऐसे में फतेहगढ़ पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद 2005 में फतेहगढ़ साहिब की पुलिस ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी। यह केस अनसुलझा था। इसके बाद कुलतार सिंह के भाई की प्रार्थना पर यह केस स्टेट क्राइम ब्रांच को शिफ्ट हो गया था। तीन अगस्त 2006 में स्टेट क्राइम बांच ने भी क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी। इसके बाद कुलतार सिंह ने 2007 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली थी। 16 मार्च 2007 में अदालत ने केस सीबीआई को दे दिया था। सीबीआई भी आरोपी तक नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद 2009 में सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट फाइल कर दी थी।
2012 में फिर किए 5 कत्ल तो पकड़ा गया
जून 2012 में खुशविंदर ने अपनी पत्नी की मामी के परिवार को निशाना बनाया था। छह लोगों की नहर में फेंक कर हत्या कर दी थी। इसमें गुरमैल सिंह रिटायर्ड पंजाब पुलिस कांस्टेबल, पत्नी परमजीत कौर, बेटा गुरिंदर सिंह, निवासी मुकंदपुर लुधियाना, रुपिंदर सिंह, बेटा जसकीरत सिंह व प्रभसिमरन कौर शामिल थे। गुरमैल सिंह पुत्री जैसमीन कौर नहर में फंस गई थी, जिससे उसकी मौत होने से रह गई थी। जैसमीन कौर की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। उनसे 36 लाख रुपये की बरामदगी हो गई।
फिर ऐसे खुला 4 लोगों की हत्या का राज
छह लोगों की हत्या में पकड़े गए आरोपी खुशविंदर ने पुलिस के सामने कबूल किया कि फतेहगढ़ साहिब में 2004 में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या की हत्या भी उसी ने की थी। उसने सीबीआई को बताया था कि मृतक कुलवंत सिंह के परिवार ने 12 लाख की जमीन बेची थी। उसे इस बात का पता था। पैसे के लालच में उसने हत्याकांड को अंजाम दिया। इसके बाद फतेहगढ़ साहिब वाला यह केस भी दोबारा खोला गया। शिकायतकर्ता कुलतार सिंह इस मामले की तह तक जाकर आरोपी को सजा करवाना चाहता था तो उसने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से 2009 में हाईकोर्ट ने केस सीबीआई मोहाली ब्रांच को सौंप दिया। 28 अगस्त 2018 को फांसी की सजा हुई।
जिस पत्नी को भी मारना था, उसकी देखभाल के लगाई रहम की अर्जी
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कोर्ट
एक ही परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतारने वाला आरोपी खुशविंदर सिंह उर्फ खुशो काफी शातिर था। जब आरोपी को फतेहगढ़ साहिब की पुलिस ने पकड़ा था तो उसने पुलिस के आगे खुलासा किया था कि उसका अगला निशाना उसकी अपनी पत्नी थी, लेकिन जब अदालत द्वारा उसे सजा सुनाई जानी थी तो दोषी उसी पत्नी और बच्चों की दुहाई देकर रहम की अपील कर रहा था।
उसका कहना था कि उसके बच्चे छोटे हैं। उसकी पत्नी ही उनका पालन पोषण कर रही है। उन सबकी देखभाल के लिए उसे राहत दी जाए। इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों की बहस हुई। सीबीआई के वकील का कहना था कि दोषी के परिवार वाले पूरे ट्रायल में तो उससे मिलने तक नहीं आए। वहीं, अभी तक भी यहां कोई नहीं आया है। ऐसे में उससे कोई रहम नहीं करना चाहिए। इसके बाद अदालत ने उसे सजा सुनाई। इससे पहले खुशविंदर ने छह लोगों को मारा था।
दो बार पत्नी को ले जा चुका था नहर पर
दोषी खुशो ने बताया था कि वह अपनी पत्नी को मारने की तैयारी में जुट गया था। वह उसे भी उस जगह पर लेकर गया था। जहां भाखड़ा नहर में फेंक कर उसने दो लोगों को मारा था। हालांकि बाद में उसने मामी के परिवार को मारने का प्लान बनाया था। इसके बाद आगे की कार्रवाई की थी। एसएसपी सिद्धू ने बताया कि इस दौरान दोषी ने कभी भी हत्याओं के लिए दुख नहीं जताया। वह उन्हें हमेशा मनोरोगी लगता था। दोषी पत्नी को मारकर अपनी छोटी साली से शादी करने की योजना बना रहा था। साथ ही अपने ससुराल डल्ला गांव की सारी जमीन को हड़पना चाहता था। उसे लगता था कि इसके बाद उसका अच्छा रसूख इलाके में हो जाएगा।
साले की नहर में डूबने से हुई थी मौत
दोषी की पत्नी मनजीत कौर सुहावी गांव में अपनी बेटी और बेटे के साथ रहती है। मनजीत कौर के भाई की 2006 में उनकी शादी के एक महीने के बाद नहर में गिरने से मौत हो गई थी। तब वह नयनादेवी में माथा टेककर आ रहा था। मनजीत कौर की माता की मौत उनकी शादी से पहले हो गई थी। उसकी साली की शादी दोषी के जेल जाने के बाद हुई थी।