भारी-भरकम स्कूल बैग, टिफिन बॉक्स तथा पानी की बोतल लेकर झुकी कमर और तिरछी चाल चलते मासूम स्कूल आते जाते दिख जाएंगे। इन मासूमों से स्कूली बस्ते सहजता से उठते भी नहीं, लेकिन अब स्कूली छात्रों का भारी बस्ता जल्द ही गुजरे जमाने की बात हो सकती है।
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स्कूली बस्ते का बोझ नहीं उठाएंगे बच्चे
आगामी शैक्षणिक वर्ष में 50 विद्यालयों में साल भर पहली कक्षा के बच्चे बिना बस्ते के ही आएंगे। उनकी पुस्तकें स्कूल में ही रखी जाएंगी। इन स्कूलों की पहचान कर ली गई है और प्रयोग सफल रहा तो इसे पूरे हरियाणा में लागू किया जाएगा। ये बातें अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा विभाग पीके दास ने कही। वे रविवार को हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से केयू के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित कक्षा तत्परता कार्यक्रम की मंडल स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
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स्कूली बस्ते का बोझ नहीं उठाएंगे बच्चे
उनकी मानें तो विद्यालयों को अधिक तनावमुक्त व ज्वायफुल करना विभाग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, ताकि बच्चों की शिक्षा व शिक्षण में रुचि बढ़ सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को कठोर दंड देना अमानवीय है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पढ़ाई का उद्देश्य केवल सूचनाएं व जानकारी इकट्ठा करना नहीं हैं, शिक्षा तभी सफल जब विद्यार्थी में उसकी आयु के अनुरुप सोचने की क्षमता विकसित हो। छात्र का अपना एक अभिमत विकसित हो।
एसीएस पीके दास ने कहा कि शिक्षा के 3 स्तर हैं जिन्हें व्यवस्थित ढंग से विकसित करना अध्यापक का कार्य हैं। पहला चरण सोचना, दूसरा उसे अभिव्यक्त करना और तीसरा चरण उस ज्ञान को कार्यान्वित करना हैं। हमें स्कूलों में भावी नागरिक तैयार करने हैं जो समाज के प्रति जवाबदेह हो। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा शुरू की गई बेटी बचाओ-बचाओ पढ़ाओ, बेटी का सलाम राष्ट्र के नाम, ज्वायफुल सटर्डे, क्वीज क्लब, कैचअप प्रोग्राम को गंभीरता से लागू करें।