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बच्चे को घर से बाहर भेजने से पहले ये सब सिखाएं, गंदी नजरों और हरकतों से बचेंगे

Tue, 18 Jul 2017 09:15 AM IST
सुशील गंभीर/अमर उजाला, चंडीगढ़
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child rape
मां बाप के लिए खबर, जब भी बच्चे घर से बाहर जाएं तो उन्हें से सब बातें जरूर सिखाएं। ऐसा करने से बच्चे गंदी नजरों और गंदी हरकतों से बचे रहेंगे।
 
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मां बाप बच्चों को ये सब समझाएं
बच्चों को समझाएं कि शरीर के किस-किस अंग पर छूना गलत है। जब भी बच्चा बाहर जाए तो उससे पूछे कि किसी ने आपको छुआ तो नहीं। बच्चा यदि घर पर हो तब भी उससे इस बारे में अक्सर पूछते रहें। बच्चों से पूछे कि स्कूल या खेलकूद के दौरान उन्हें फोटोग्राफी या वीडियो तो नहीं दिखाया जाता। बच्चों को बताएं कि उनके लिए कौन कौन से शख्स खतरनाक हो सकते हैं। 
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ऐसे व्यक्ति बच्चों के लिए खतरनाक
जो बच्चों के साथ ज्यादा घुलने-मिलने की कोशिश करते हों। बच्चों को अक्सर अकेले बाहर ले जाने की बात करते हों। बच्चों को अनडिमांड व सरप्राइज गिफ्ट देते हों बच्चों को जबरदस्ती किस, गले मिलना और उन्हें पकड़ते हों। किसी व्यक्ति की पर्सनल सेक्सुअल लाइफ डिस्टर्ब हो। 

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बता दें कि अब स्कूली बच्चों को शारीरिक प्रताड़ना से बचाने केलिए प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पोक्सो) का पाठ पढ़ाया जाएगा। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइटस (एनसीपीसीआर) ने इस संबंध में दिशा निर्देश दिए थे। इसे लागू करने के लिए यूटी शिक्षा विभाग की डीईओ ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए थे। 
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दरअसल फरवरी 2017 में कुछ स्कूली छात्रों ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें शारीरिक प्रताड़ना के कुछ मामलों का हवाला देते हुए उचित कदम उठाने की मांग की गई थी। इस पर एनसीपीसीआर ने संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग को गाइडलाइंस जारी की हैं। जिसकेआधार पर सभी स्कूलों में एक कमेटी बनाकर समय-समय पर ट्रेंनिंग कार्यक्रम चलाने होंगे और बच्चों को शिक्षित करना होगा।
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रेप - फोटो : demo pics
प्रिंसिपल तय करें शेड्यूल
डीईओ ने जारी निर्देश में कहा है कि बच्चों को पोक्सो के बारे में कैसे शिक्षित करना है, यह स्कूल प्रिंसिपल तय करें। स्कूल को ही अपने टाइम टेबल केहिसाब से इसे लागू करना है। किसी स्कूल में यह पाठ साप्ताहिक हो सकता है और कहीं पर हर माह इस एक्ट को समझाने केलिए स्पेशल क्लॉस लग सकती है। इसके अलावा विभिन्न प्रतियोगिताओं केजरिये भी बच्चों केअधिकारी समझाने और उन्हें जागरूक करने का काम किया जाए।
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बच्ची से रेप
ये गाइडलाइंस जारी की गई है
बच्चों को शारीरिक प्रताड़ना से बचाने की जिम्मेवारी प्रिंसिपल की होगी। प्रिंसिपल या तो खुद या किसी अध्यापक की जिम्मेदारी तय करे। स्कूल में वर्कशॉप का आयोजन किया जाए। अलग-अलग तरह के यौन शोषण के बारे में अवगत कराया जाए। बच्चों से तालमेल बनाया जाए और उन्हें प्रताड़ना के कारण और संकेत से अवगत कराया जाए। स्कूल स्तर पर एक खाका तैयार किया जाए कि किस स्तर पर इस दिशा में काम किया गया।

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बच्ची से रेप
यूटी में आए हैं बच्चों से जुड़े मामले
शहर में इस तरह के कई मामले हो चुके हैं, जब स्कूली बच्चे यौन शोषण का शिकार बने हों। थिएटर एज एनजीओ के संचालक जुलफिक्कार प्रकरण ने तो सभी को झकझोर कर रख दिया था। उससे पहले 2015 में एक स्कूल से ऐसा मामला सामने आया था, जब स्कूल में ही छात्रा यौन शोषण का शिकार बनी।
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बच्ची के साथ दुराचार किया
सभी स्कूलों में सर्कुलर जारी किया गया है। प्रिंसिपल इसे हेड करेंगे और उन्हें ही अपने टाइम टेबल के हिसाब से पोक्सो केबारे में जागरूक करने का शेड्यूल तय करना है।
- राजिंद्र कौर, डीईओ, चंडीगढ़
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