ये तस्वीरें देखकर और मामला जानकर सिर शर्म से झुक जाएगा, अपनी जान तो बहुत प्यारी है, लेकिन दूसरे की जिंदगी की परवाह नहीं।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 6
बाल मजदूरी
जो पंचकूला में क्लिक की गई। दरअसल, घग्गर नदी को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए शुरू मुहिम के तहत रोजाना 100 किलोग्राम से अधिक कचरा नदी से निकाला जा रहा है। लेकिन इस अभियान में नौनिहालों को शामिल कर सफाई के लिए पानी में उतारना कभी भी परेशानी का सबब बन सकता है। टी शर्ट, कैप और ब्रेकफास्ट के लालच में नदी में बच्चों को सफाई के लिए उतारा गया।
विज्ञापन
3 of 6
बाल मजदूरी
अगर, नदी में उतरकर इसकी सफाई में जुटे नौनिहालों के साथ कोई अनहोनी हो जाए तो इसके लिए न तो किसी तरह की चिकित्सा सुविधा और न ही कोई लाइफ गार्ड है। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने एनजीओ सहित स्थानीय लेागों के सहयोग से घग्गर से प्लास्टिक को साफ करने का बीड़ा उठाया है। सफाई से नदी की शक्ल तो बदल रही है और इसका असर भी दिख रहा है, लेकिन छोटे बच्चों को इस तरह नदी में साफ सफाई के लिए उतारने को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
4 of 6
बाल मजदूरी
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. आरके चौहान ने बताया कि स्कूली बच्चों को वीरवार को नहीं शामिल किया गया। आसपास के कुछ छोटे बच्चे जो रोजाना वहां नहाने या कपड़े धोने के लिए पहुंचते हैं, उन्हें पर्यावरण और प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण के प्रति जागरूक किया गया। इसके लिए मना करने पर भी वह अभियान में शामिल हुए, जिसे देखते हुए उन्हें टी शर्ट और ब्रेकफास्ट के साथ साथ टोपियां भी दी गईं।
विज्ञापन
5 of 6
बाल मजदूरी
हालांकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि शुक्रवार से छोटे बच्चों को इस अभियान में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नदी में पानी का स्तर काफी कम है, इसलिए किसी तरह की अनहोनी की आशंका नहीं है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत मैं भी शामिल हुआ।
पानी में उतारने से पहले किसी अनहोनी से बचाव के लिए होने चाहिए पर्याप्त इंतजाम, न लाइफ गार्ड और न ही चिकित्सा सुविधा। 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सफाई अभियान में शामिल किया जाना कानूनन भी ठीक नहीं है। सफाई के बाद निकलने वाले कचरा और आसपास के कचरे को जलाए जाने से एक बार फिर प्रदूषण बढ़ता है।