यह न सिर्फ साल का पहला चंद्रग्रहण था बल्कि कई सालों बाद बने इस अनूठे संयोग में चांद तीन रंगों में नजर आया। देखिए
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अमृतसर में दिखा ऐसा नजारा
पूर्ण चंद्रग्रहण देखने के लिए चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, भोपाल, चेन्नई, जयपुर समेत कई शहरों के लोग खुली जगहों पर उमड़ पड़े। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहे।
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Blue Blood Supermoon
खगोलशास्त्रियों का मानना है कि ऐसा संयोग लगभग 150 वर्षों में बनता है जिसमें सुपर मून, ब्लू मून और ब्लड मून तीनों नजर आता है। शाम 4.21 बजे चांद के पृथ्वी के कक्षा में प्रवेश करते ही चंद्रग्रहण शुरू हुआ।
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supermoon
- फोटो : AmarUjala
ठीक दो घंटे बाद चांद पर पृथ्वी की छाया बनी और पूरा अंधेरा छा गया। इसी दौरान चांद तीन रंगों में नजर आया। शाम 7.37 बजे चांद ने रक्तिम यानी ब्लड मून और फिर ब्लू मून का नजारा दिखाया।
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सुपरमून
- फोटो : amar ujala
चंडीगढ़ के 120 से अधिक मंदिरों के कपाट चंद्र ग्रहण के दौरान बंद रहे। लोगों ने अपने घरों में पूजा-अर्चना की। चंद्रग्रहण शाम 5.35 बजे से रात 8.42 बजे तक रहा। सेक्टर-18, 19, 22, 24 सहित शहर के सभी मंदिर ग्रहण केदौरान बंद रहे।
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सुपरमून
- फोटो : amar ujala
सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि सुबह सूर्योदय से पहले ही ग्रहण का सूतक लग गया था। इस दौरान मंदिर में मूर्ति दर्शन और मूर्ति स्पर्श निषेध माना गया है।
भूकंप और चंद्रग्रहण में संबंध नहीं: वैज्ञानिक
चंद्रग्रहण और अफगानिस्तान में आए भूकंप को आपस में जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि चंद्रग्रहण साधारण खगोलीय घटना है। इसका मानव जीवन या पृथ्वी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।