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सावधान! इन सड़कों पर नहीं चल पाएंगे आप, जानलेवा हैं क्रॉसिंग

Tue, 13 Jun 2017 01:18 AM IST
कुलदीप शुक्ला/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शहर में चार सड़कों पर ऐसी क्रॉसिंग हैं, जहां हमेशा जान जोखिम में रहती है। चाहे पैदल हों या फिर किसी वाहन में। अक्सर हादसे होते हैं, मगर पुलिस की ट्रैफिक व्यवस्था दम तोड़ गई है। 
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यहां न तो लाइट्स की व्यवस्था है और न ही पुलिस यहां तैनात होती है। हां, इन खतरनाक स्पॉट के नजदीक ट्रैफिक पुलिस चालान काटती आपको जरूर नजर आ जाएगी। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को इन स्पॉट को चेक किया तो कोई पुलिसकर्मी नजर नहीं आया। जिम्मेदारी से बचने के लिए पीजीआई-पीयू गेट के सामने वाली क्रॉसिंग पर तो ट्रैफिक पुलिस ने बैरिकेड ही लगा दिए।
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 पीजीआई-पीयू गेट : सड़क क्रॉस करने में लगे 8 मिनट
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट सुरेंद्र कुमार करीब सात से आठ मिनट तक पीजीआई-पीयू गेट के सामने ट्रैफिक कम होने का इंतजार करते रहे, ताकि वह सड़क पार कर सकें। सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें तो अब पता चला कि इस सड़क को पार कितना मुश्किल है। पीजीआई में आने वाले सैकड़ों मरीजों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता होगा। ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक इस सड़क पर एक वर्ष में 13 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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सेक्टर-14/25 पीयू गेट : लाइट प्वाइंट जरूरत बन चुकी
सेक्टर 14/25 की क्रासिंग पर पीयू-यूआईटी के हजारों कर्मचारी, रेजिडेंट्स, ई-रिक्शा, वाहन चालक समेत आसपास की पब्लिक निकलती है। वाहन इतने तेजी से निकलते हैं कि सड़क पार करना हर किसी के बस की बात नहीं। गाड़ियां रुकने का नाम नहीं लेती। पंजाब यूनिवर्सिटी में जॉब करने वाले अनिल कुमार ने बताया कि यहां लाइट प्वाइंट एक जरूरत बन चुकी है। पुलिस-प्रशासन सर्वे करे तो रोजाना एक सड़क हादसा दर्ज किया जा सकता है। जब गाड़ियां नहीं रुकती तो पैदल यात्री जान में जोखिम डालकर सड़क क्रॉस करते हैं।
 
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खुड्डा लाहौरा क्रॉसिंग रोड : कई बार प्रशासन से लगाई गुहार
खुड्डा लाहौरा निवासी व किसान स्वर्ण सिंह ने बताया कि इस क्रॉसिंग पर लाइटें न होने के कारण दोनों गांव के बच्चों और महिलाओं का निकलना मुश्किल हो जाता है। खास तौर पर शाम के वक्त। वाहन तेजी से निकलते हैं। दोनों गांव के लोग कई बार यहां लाइट लगाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस क्रॉसिंग पर तेज रफर गाड़ियों के चपेट में आकर कई मासूम जान गंवा चुके हैं। 
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सेक्टर-39/मलोया क्रॉसिंग : रॉन्ग साइड गाड़ियों को रोकने में पुलिस फेल
सेक्टर-39 और मलोया को जोड़ने वाली सड़क पर कई हादसे हो चुके हैं। यहां मात्र 100 मीटर की दूरी पर क्रॉसिंग होने के कारण अधिकतर गाड़ियां रॉन्ग साइड से आती हैं। मलोया निवासी राजू ने बताया कि 1 साल में मलोया से सेक्टर-39, 40, 41 या अन्य सेक्टरों के लिए जाने वाले करीब 13 घायल उसकी पहचान में आते हैं। महिलाओं को सड़क क्रॉस करने में 15 मिनट लग जाते हैं।
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डेढ़ साल में 39 राहगीरों की मौत, 22 कर रहे थे सड़क क्रॉस 
वर्ष 2016 में सड़क पर पैदल चलने वाले 39 लोगों ने सड़क हादसे में जान गंवाई है। वहीं, मई 2017 तक 13 पैदल चलने वालों की लोगों की जान जा चुकी है। यानी डेढ़ साल में पैदल चलने वाले 52 में 22 लोग सड़क क्रॉस करते हुए हादसे का शिकार बने हैं।
 
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सैकड़ों प्रपोजल भेजे हैं यूटी प्रशासन को 
ट्रैफिक से जुड़े कई संभावित बदलाव व नए सिस्टम से संबंधित सैकड़ों प्रपोजल यूटी पुलिस की ओर प्रशासन को भेजे हैं। संभावना है कि जल्द प्रपोजल पास होने के बाद काफी लोगों की कई शिकायतें दूर हो जाएंगी।
रवि कुमार, एसपी ट्रैफिक, यूटी
 
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