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चंडीगढ़ में छह महीने बाद खुले स्कूल, किसी स्कूल में एक तो किसी में नहीं पहुंचा एक भी विद्यार्थी

Mon, 21 Sep 2020 02:10 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, चंडीगढ़

सार

  • नौंवी और 12वीं कक्षा के विद्यार्थी पहुंचे स्कूल, कुछ स्कूलों में साढ़े 9 बजे से लगीं कक्षाएं
  •  स्कूलों पर निगरानी रखने के लिए सुबह से ही शुरु हो गई थी अधिकारियों की दौड़ भाग
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स्कूलों में पहुंचे विद्यार्थी - फोटो : अमर उजाला
अनलॉक-4 के तहत नौवीं से 12वीं तक के स्कूल सोमवार से खुल गए। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में कोरोना से बचाव के सभी इंतजाम कर रखे थे लेकिन पहले दिन गिने-चुने विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे। अभिभावकों के सहमति पत्र, थर्मल स्क्रीनिंग और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए विद्यार्थियों ने स्कूलों में प्रवेश किया। ज्यादातर स्कूलों में सुबह 9:30 बजे से लेकर 11:30 बजे तक कक्षाएं लगाई गईं। इस दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों से दूरी बनाए रखी और सभी के मुंह पर मास्क नजर आए। स्कूलों पर नजर रखने के लिए खुद शिक्षा सचिव सरप्रीत सिंह गिल भी मैदान में उतरे। 
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- फोटो : अमर उजाला
छह महीने के बाद सोमवार को स्कूलों में छात्र नजर आए। कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों के बीच चंडीगढ़ शिक्षा विभाग ने नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोल दिए हैं। पहले दिन ज्यादातर स्कूलों ने विद्यार्थियों के लिए सुबह 9 बजे का समय रखा था। शिक्षा विभाग की तरफ से कराए गए सर्वे में भले ही 25000 विद्यार्थियों के अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने की इच्छा जताई थी लेकिन सोमवार को जब स्कूल खुले तो शहर के 90 स्कूलों में सिर्फ 960 विद्यार्थी ही पहुंचे। एक-दो स्कूलों में तो एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा, जबकि कुछ स्कूलों में 3 से लेकर 5 विद्यार्थी पहुंचे। औसतन प्रत्येक स्कूल में 8 से 10 विद्यार्थी ही नजर आए। 
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- फोटो : अमर उजाला
जीएमएसएसएस-35 में एक, जीएमएसएसएस-22 में 2, जीएमएचएस-41ए में 4 तो जीएमएसएसएस-36 में एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा। सुबह 9 बजे विद्यार्थियों के पहुंचने के बाद सबसे पहले गेट पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग की गई। जिन विद्यार्थियों के शरीर का तापमान सामान्य था, उनके पास अभिभावक द्वारा लिखित में दिए गए स्कूल भेजने के सहमति पत्र को देखने के बाद ही उन्हें स्कूल में प्रवेश दिया गया।

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- फोटो : अमर उजाला
एक कक्षा में 10 ही विद्यार्थियों की बैठने की अनुमति दी गई थी। विद्यार्थियों को निश्चित दूरी पर बैठाया गया। इस दौरान ज्यादातर स्कूलों में दो विषय की कक्षाएं लगीं। सुबह 9:30 बजे से कक्षा शुरू हुई जो 11:30 बजे तक चली। इस दौरान विद्यार्थियों और अध्यापकों ने मुंह पर मास्क लगाए हुए थे और एक दूसरे से दूरी बनाकर पढ़ाई की।   
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- फोटो : अमर उजाला
पहले दिन नहीं आई कोई दिक्कत, विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद 
स्कूलों के खुलने के बाद से किसी तरह की सुरक्षा मानकों में कोई कमी न रह जाए, इसलिए शिक्षा विभाग के अधिकारी सोमवार सुबह से ही दौड़ते नजर आए। शिक्षा सचिव सरप्रीत सिंह गिल खुद मैदान में उतरे और जीएमएसएसएस-15 में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान स्कूल की प्रिसिंपल हरमनजीत कौर धालीवाल और सुनील बेदी भी उपस्थित रहे। 
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- फोटो : अमर उजाला
शिक्षा सचिव स्कूल की तैयारियों से संतुष्ट दिखे। स्कूल की प्रिंसिपल हनमनजीत कौर धालीवाल ने बताया कि स्कूल में विद्यार्थियों से पहुंचने से पहले सैनिटाइजेशन का काम कराया गया। शिक्षा विभाग की तरफ से जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया। पहले दिन किसी तरह की कोई समस्या नहीं आई इसलिए उम्मीद है कि आने वाले दिनों में विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा होगा। 
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- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा शिक्षा विभाग की तरफ से नियुक्त किए गए विभिन्न अधिकारी भी अपने कलस्टर के अनुसार स्कूलों में पहुंचते रहे और जांच करते रहे। गौरतलब है कि शिक्षा सचिव सरप्रीत सिंह गिल ने कलस्टर के अनुसार शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें 21 सितंबर से लेकर 25 सितंबर तक अपने कलस्टर के स्कूलों में जाकर सुरक्षा मानकों की जांच करनी है। इसके बाद 25 सितंबर को शाम 4 बजे से पहले अपनी रिपोर्ट भेजनी होगी। 

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- फोटो : अमर उजाला
इसलिए स्कूलों में कम पहुंचे विद्यार्थी  
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने गूगल फॉर्म के जरिए शहर के 90 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के माता-पिता से उनकी इच्छा पूछी थी। इस सर्वे में करीब 25000 विद्यार्थियों के अभिभावकों की तरफ से उनके बच्चों को स्कूल भेजने की इच्छा जाहिर की गई थी लेकिन पहले दिन शहर के 90 स्कूलों में 960 विद्यार्थी ही पहुंचे।
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- फोटो : अमर उजाला
ऐसा क्यों हुआ, नाम न छापने की शर्त पर एक स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि स्कूल की तरफ भेजे गए गूगल फॉर्म ज्यादातर विद्यार्थियों के मोबाइल पर भेजे गए थे। विद्यार्थियों ने खुद ही वह फॉर्म भरकर स्कूल आने की इच्छा जताई थी। शहर के पेरिफेरी व कालोनियों वाले स्कूलों में तो 60 प्रतिशत विद्यार्थियों ने फॉर्म भरकर स्कूल को भेज दिया था, जिसकी वजह से स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या काफी ज्यादा नजर आ रही थी लेकिन विभाग ने विद्यार्थियों के पास उनके माता-पिता द्वारा लिखा गया लेटर मांगा अनिवार्य कर दिया गया, जिसकी वजह से ज्यादातर विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंचे।
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