पीयू कैंपस में चुनाव लड़ने वाली छात्र संगठनों ने चुनाव में जीत के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है। पीयू छात्र काउंसिल में जीत की चाबी गर्ल्स वोटर के हाथ में हैं। पीयू के 14 हजार से अधिक वोट 70 फीसदी से अधिक छात्राओं के हैं। छात्राओं के बीच अपनी पैठ बनाने वाले छात्र संगठन को ही चुनाव में फायदा मिलेगा।
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PU Election 2016
- फोटो : Amar ujala
पीयू में संभावित एक सितंबर से चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में सभी बड़े छात्र संगठनों ने गर्ल्स हॉस्टल में आना-जाना शुरू कर दिया है। पीयू के नौ गर्ल्स हॉस्टल्स में पांच हजार से अधिक छात्राऐं हैं। शाम होते ही छात्र नेता अपने समर्थकों के साथ गर्ल्स हॉस्टल पहुंच जाते हैं।
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पीयू के लगभग सभी गर्ल्स हॉस्टल के बाहर रात 10 बजे तक मेले जैसा नजारा देखने को मिल रहा है। वोटर्स को लुभाने के लिए सभी संगठनों ने अपने संगठन में गर्ल्स विंग बनाई हैं। छात्राओं के बीच पैठ बनाने के लिए कई छात्र संगठन फिल्म और ट्रिप का भी जमकर ऑफर दे रहे हैं।
वोट पर लड़कियों का कब्जा, लेकिन प्रधान हमेशा लड़के
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बेशक पीयू छात्र काउंसिल चुनावों में जीत का फैसला लड़कियों के वोट करते है। लेकिन पीयू की राजनीति में अभी तक किसी छात्रा को प्रधान पद की कुर्सी नहीं मिल पाई हैं। 2008 में सोपू-इनसो गठबंधन ने पहली बार दीपिका ठाकुर को जनरल सेक्रेटरी के पद पर मैदान में उतारा और उन्होंने जीत हासिल की थी। छात्र काउंसिल में अधिकतर छात्राओं को वाइस प्रेसिडेंट पद दिया जाता है। लेकिन इस पद का पीयू काउंसिल में कोई खास महत्व नहीं होता है। इस साल भी अभी तक किसी छात्र संगठन ने छात्रा को प्रधान पद के लिए प्रोजेक्ट नहीं किया है।
छात्र काउंसिल चुनाव से पहले पीयू में वोटर्स को लुभाने के लिए कसौली, शिमला और सोलन के ट्रिप जा रहे हैं। उधर शनिवार को पीयू के गेट नंबर-1 से बाहरी गाड़ियों की एंट्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। जानकारी अनुसार शनिवार को चेकिंग के दौरान कई गाड़ियों से शराब की बोतलें पकड़ी गई थी। कैंपस में जाने वाली कई गाड़ियों से बेसबॉल के बैट और डंडे भी पकड़े गए हैं।