जिस मां ने जन्म दिया और गोद में खिलाया, उसी ने कंधा देकर बेटे को अंतिम विदाई दी। देखिए, देश पर कुर्बान होने वाले एक शहीद की अंतिम यात्रा।
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शहीद जवान गुरविंदर सिंह को अंतिम विदाई
8 जून को जम्मू कश्मीर के पूंछ रजौरी सेक्टर की डाची पोस्ट पर शहीद हुए बीएसएफ के जवान गुरविंदर सिंह को शुक्रवार को अंतिम विदाई दी गई। अपने बहादुर बेटे की अर्थी को मां सरबजीत कौर ने कंधा दिया और सेल्यूट करके विदा किया।
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शहीद जवान गुरविंदर सिंह को अंतिम विदाई
137 बटालियन के कांस्टेबल गुरविंदर सिंह का उनके पैतृक गांव मानेपुर में राजकीय सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बीएसएफ की 12 बटालियन के जवानों ने सहायक कमांडेंट योगेश की अध्यक्षता में शहीद को अंतिम सलामी दी गई।
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शहीद जवान गुरविंदर सिंह को अंतिम विदाई
इससे पहले तिरंगे में लिपटा हुआ शहीद का शव जब गांव मानेपुर पहुंचा तो सभी गमगीन हो गए। शहीद की माता सरबजीत कौर ने अपने शहीद बेटे की अर्थी को कंधा दिया तो मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई। शहीद के शव को उनके बड़े भाई रुपिंदर सिंह ने अग्नि दी।
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जम्मू आतंकी हमले में पंजाब का गुरविंदर सिंह शहीद
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से कैबिनेट मंत्री राजिंदर सिंह बाजवा ने शहीद को श्रद्धांजलि के फूल अर्पित करके शहीद परिवार को पंजाब सरकार द्वारा दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता, गांव में एक यादगारी गेट बनाने के अलावा अन्य सुविधाएं देने की घोषणा की।
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जम्मू आतंकी हमले में पंजाब का गुरविंदर सिंह शहीद
इस मौके पर शहीद के पिता सतविंदर सिंह ने कहा कि बेटे के जाने से उनके बुढ़ापे की लाठी टूट गई है, मगर उसकी शहादत पर उनको बहुत गर्व है। उनके दोनों बेटों में बचपन से ही देश भक्ति की भावना भरी हुई थी और उनको शुरू से भारतीय सेना में भर्ती होने का बहुत शौक था।
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जम्मू आतंकी हमले में पंजाब का गुरविंदर सिंह शहीद
पिता सतविंदर सिंह ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। गुरविंदर बीएसएफ में था तो दूसरा रुपिंदर आर्मी में है। बचपन से ही दोनों में देश सेवा का जज्बा था। गुरविंदर वह 2012 में बीएसएफ की 137 बटालियन में भर्ती हुआ था।
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जम्मू आतंकी हमले में पंजाब का गुरविंदर सिंह शहीद
शहीद के पिता ने बताया कि दो माह पूर्व ही जालंधर से पूंछ राजौरी सेक्टर में तैनाती हुई थी। हंसमुख और मिलनसार स्वभाव का उनका बेटा गुरविंदर हॉकी प्लेयर था और जालंधर की हॉकी टीम में खेलता था।
शहीद के पिता ने बताया कि गुरविंदर सिंह की अभी शादी नहीं हुई थी। शादी करने की बातचीत चल रही थी कि यह खबर आ गई। बेटे की शहादत पर परिजनों एवं गांव के लोगों की आंखें तो नम हैं, लेकिन उसकी बहादुरी पर भी सभी को गर्व है।