रणजीत घर में सबसे छोटा था। उसे विदेश में जाकर कमाने का शौक था। 16 साल पहले जैसे ही उसने 12वीं की पढ़ाई पूरी की। वह भाइयों के पास ग्रीस चला गया। वहां बढ़िया काम कर रहा था। सब कुछ सही चल रहा था, तभी अचानक 15 जुलाई 2014 को उसे ग्रीस पुलिस ने डिपोर्ट कर दिया, लेकिन अब तक वह घर नहीं पहुंचा है।
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भाई-बहन की तलाश
- फोटो : अमर उजाला
उससे बात करने के लिए मेरी बुजुर्ग मां रोज कहती है, लेकिन हम उसे कुछ बता नहीं पा रहे हैं, यह कहते ही खरड़ निवासी हरमेश कौर रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुषमा स्वराज से ही उम्मीद है। उन्होंने दोनों को पत्र लिख पूरे केस के बारे में जानकारी दी है। हरमेश ने बताया कि उनका मायके गांव जब्बोवाल तहसील शहीद भगत नगर जालंधर में है। वह चार भाई-बहन हैं।
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भाई-बहन की तलाश
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उनके दो भाई अभी ग्रीस में हैं। उनके पास रणजीत चला गया था। वह एथेंस में रहा और कई साल तक काम किया। अचानक 15 जुलाई 2014 को ग्रीस पुलिस ने उसे इंडिया डिपोर्ट कर दिया था। ग्रीस पुलिस के मुताबिक उसे एथेंस से दिल्ली की फ्लाइट में भेजा गया था। जो वाया दोहा होकर आई थी। इसके बाद उन्होंने ग्रीस की एंबेसी को पत्र लिखा।
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भाई-बहन की तलाश
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उनकी तरफ से जवाब आया कि उसे इंडिया भेज दिया गया है। इसके बाद उन्होंने कतर एयरवेज से इस बारे में जानकारी मांगी, लेकिन एयरलाइंस कंपनी से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
जगह-जगह खाए धक्के- हरमेश ने बताया कि रणजीत की तलाश में उन्होंने दिल्ली के कई चक्कर लगाए। वह इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी गई हैं। वहां पर उसके गुम होने की शिकायत भी दर्ज करवाई।
इसके अलावा उन्होंने एयरपोर्ट में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग भी देखीं, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के सभी गुरुद्वारों और अस्पताल में उसकी तलाश की, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं लगा।
छुट्टी लेकर जाते हैं तलाशने- रणजीत के जीजा प्यारे लाल ने बताया कि उसकी तलाश में परिवार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। वह केंद्रीय विद्यालय में नौकरी करते हैं और छुट्टी लेकर उसे तलाशने जाते हैं।