तस्वीरों में हम जो आपको सच्ची दास्तां बताने जा रहे हैं, उससे न सिर्फ आप बेटी के जज्बे की तारीफ करेंगे, ब्लकि उसके पिता की मेहनत को भी सेल्यूट करेंगे। देखिए, पूरा मामला।
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सेल्यूटः बेटी टीचर, पापा स्टूडेंट...और नतीजा चौंकाने वाला
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ये वाक्या है यमुनानगर की 11वीं पास बेटी और उसके 10वीं पिता के जज्बे का। पिता को मिल रहे तानों से दुखी बेटी ने अपने पिता को ही पढ़ाने का संकल्प ले लिया। बेटी टीचर बन गई और पापा स्टूडेंट। नतीजा, चौंकाने वाला।
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सेल्यूटः बेटी टीचर, पापा स्टूडेंट...और नतीजा चौंकाने वाला
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यमुनागर जिले के गांव ममीदी के लेखराम ने 41 की उम्र में दाखिले के लिए हरियाणा ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड में अप्लाई किया। पढ़ाई का समाधान भी बेटी ने निकाला। स्कूल में जो पढ़ती, उसे इंदू घर पर रोज लेखराम को 2 घंटे पढ़ाती। हर रविवार को छछरौली में लगने वाली क्लास में जाता।
सेल्यूटः बेटी टीचर, पापा स्टूडेंट...और नतीजा चौंकाने वाला
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पेशे से कार ड्राइवर लेखराम ने 1993 में 10वीं पास की थी। कई जगह नौकरी मांगने गए। जहां भी गए, वहां सब यही कहते कि 10वीं पास तो अनपढ़ के बराबर है। इस बारे में एक दिन घर पर बात चली तो बेटी इंदू को बुरा लगा। उसने ठान लिया कि पिता अनपढ़ नहीं रहेंगे। वह उन्हें पढ़ाएगी।
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इंदू रात-रात भर जागकर पिता की टीचर बनती और उन्हें 12वीं कक्षा की तैयारिया करवाती, सुबह खुद स्कूल जाती। आखिरकार 6 मई को भिवानी बोर्ड का रिजल्ट आया तो इंदू की फर्स्ट डिवीजन आई। 5 जून को ओपन बोर्ड का रिजल्ट आया तो लेखराम को भी फर्स्ट डिवीजन मिली।
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ओपन बोर्ड में मात्र 35% स्टूडेंट ही पास हुए। वहीं, भिवानी बोर्ड का रिजल्ट 53.96% रहा। लेखराम ने बेटी से 2 अंक ज्यादा प्राप्त किए। बेटी की जिद और उनके आगे बढ़ने की इच्छा ने लेखराम को 12वीं पास बना दिया।