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'राहत कैंप में नहीं जाएंगे, पाकिस्तान से जंग हुई तो सेना का साथ देंगे'

Wed, 05 Oct 2016 04:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरदासपुर(सुरेंद्र पाल)
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बार्डर से सटे गांव में काम करती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
भारत-पाकिस्तान सीमा पर गुरदासपुर में 10 किलोमीटर एरिया में बने गांवों से कोई राहत शिविर में जाने को तैयार नहीं है। लोग शिविर में जाने से अच्छा जंग में जाने को समझते हैं। 
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बार्डर से सटे गांव का सरकारी स्कूल
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास गुरदासपुर का करीब 10 किमी का रास्ता पाकिस्तान से सटा है। इलाके में 294 गांव हैं। इनमें पांच गांव रावी दरिया के पार हैं। सरकार की तरफ से गुरदासपुर में गोल्डन इंस्टीट्यूट और सुखजिंदरा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग में दो राहत शिविर बनाए गए हैं। 
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बॉर्डर से सटे गांवों के लोगों के लिए बने राहत कैंप - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी इन राहत शिविरों में कोई आने के लिए तैयार नहीं है। राहत शिविरों न तो पीने का पानी है और न ही बिस्तरों का प्रबंध है। टेंट को ही जमीन पर बिछाकर लोगों का इंतजार किया जा रहा है। गोल्डन इंस्टीट्यूट के बेसमेंट में राहत शिविर एक बड़े हॉल में है। 

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बॉर्डर से सटे गांवों के लोग - फोटो : अमर उजाला
इसकी दीवारों में सीलन है और फर्श गंदगी से अटा पड़ा है। पीने का पानी तक नहीं है और बिजली के तार बाहर निकले हुए हैं। अमर उजाला की टीम जब यहां पहुंची तो वहां हालात काफी खराब थे। कमरे से सीलन की बदबू आ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे हॉल को कभी खोला ही नहीं गया था।
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बार्डर से सटे गांव में काम करती महिलाएं
प्रशासन का कोई भी प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था। इंस्टीट्यूट के कर्मचारियों ने हॉल को खोलकर अंदर का नजारा दिखाया। ऐसा ही नजारा सुखजिंदरा इंस्टीट्यूट का भी था। वहां लाइब्रेरी के हाल को शिविर के रूप में खोला गया था। वहां भी न तो बिस्तर थे और न ही पीने का पानी।
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बॉर्डर से सटे गांवों के लोग - फोटो : अमर उजाला
सीमावर्ती गांव की सरपंच रणदीप कौर का कहना है कि शिविरों में मच्छर हैं, गंदगी है। वहां वह कैसे अपने बच्चों या लोगों को भेज सकते हैं। इससे तो सीमा पर रहकर टक्कर लेना बेहतर है। राहत शिविरों में वह बीमार होने नहीं जाएंगे।
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'राहत कैंप में नहीं जाएंगे, पाकिस्तान से जंग हुई तो सेना का साथ देंगे'
प्रीतम सिंह ने बताया कि पुलिस कह रही थी कि चलो शिविर में। पुलिस को सारे गांव ने मिलकर जवाब दे दिया कि हम नहीं जाना चाहते शिविरों में। इसके बदले हमें जेल तो नहीं भेज सकते न।
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