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अकेले का दिल नहीं लगता जब आप नहीं रहते... पढ़िए महंत चांदनाथ के आखिरी शब्द

Tue, 19 Sep 2017 09:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
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Mahant Chand Nath
अस्पताल में उपचार के दौरान महंत चांदनाथ ने कुछ शब्द लिखे थे। पढ़िए क्या थे वो शब्द, जिसने सभी को भावुक कर दिया।
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Mahant Chand Nath
महंत चांदनाथ के जीवन में बाबा मस्तनाथ शिक्षण संस्थान को शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, अनुशासन, विज्ञान और अध्यात्म का हब बनाना लक्ष्य था। वह चाहते थे कि उनके मठ में आने वाले लोगों को विज्ञान और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिले। 
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Chand Nath Yogi passes away
अपोलो अस्पताल में उपचार के दौरान महंत ने कुछ शब्द लिखे थे। उन्होंने लिखा, ‘अकेले का दिल नहीं लगता, जब आप नहीं रहते’। बाबा मस्तकुलपति डॉ. आहूजा ने बताया कि अहसास भी नहीं होता कि महंत अब इस दुनिया में नहीं है। हमेशा लगता है कि उनका आशीर्वाद और वह मेरे साथ हैं। डॉ. आहूजा ने नम आंखों से महंत की लिखी अंतिम पंक्तियां दिखाई। 

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Chand Nath Yogi passes away
कैंसर से बचे, लंग्स आर्चरी में हुई समस्या से हुआ निधन
बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मारकंडेय आहूजा ने बताया कि कैंसर के चलते महंत चांदनाथ का यूएसए में काफी समय से उपचार चल रहा था। उनको ट्रीटमेंट के दौरान सर्जरी, रेडियोथैरेपी, कीमोथैरेपी दी गई और यूएसए के निजी अस्पताल के अनुसार दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उपचार चल रहा था। उन्हें कैंसर से तो राहत मिल गई, लेकिन पेट में खाने की ट्यूब लीक हो गई और उसका चार बार आपरेशन करना पड़ गया।
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आसन मुद्दा में महंत चांदनाथ को दी गई समाधि
डॉ. आहूजा ने बताया कि शनिवार रात को वह शौचालय गए और उनको सांस संबंधी समस्या हुई। इससे भी उन्हें राहत दिला दी गई। बाद में उनकी लंग्स आर्चरी में समस्या हो गई, इस समस्या में वेंटीलेटर भी काम नहीं करता। उन्हें आईसीयू में रखा गया और सभी जरूरी प्रयास किए गए, लेकिन महंत को बचाया नहीं जा सका।
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आसन मुद्दा में महंत चांदनाथ को दी गई समाधि
उन्होंने बताया कि उनकी महंत से रात साढे़ आठ बजे बात भी हुई थी, महंत ने कहा कि वह घर चले जाएं और अपनी मां से मिल आएं। उनकी हाल ही में सर्जरी हुई है। वह दो तीन किलोमीटर ही गए थे कि उनके पास मठ से फोन आया कि महंत की सांस लेने में दिक्कत हो रही है। जब वह लौटे तो वह ठीक थे, उनसे 10 मिनट चर्चा भी हुई। लेकिन अचानक आधी रात उनकी तबीयत अधिक बिगड़ गई।
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