अटल बिहारी वाजपेयी की जिस भाषण शैली की दुनिया कायल रही है, वही अटल अपने पहले भाषण में बीच में ही भूल गए थे।
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Atal Bihari Vajpayee
दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी पर डॉ. प्रीतम सिंह द्वारा लिखी गई पुस्तक का विमोचन तीन साल पहले आज ही के दिन कुरुक्षेत्र में विद्या भारती के संस्कृति भवन में हुआ था। बता दें डॉ. प्रीतम सिंह वे पहले शख्स हैं, जिन्होंने वाजपेयी पर शोध करने की पहल की। पूरे देश की किसी यूनिवर्सिटी में यह पहला रजिस्ट्रेशन था, जिसे वाजपेयी के जीवन पर शोध के लिए कराया गया था। उन्होने लिखा कि...
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atal bihari vajpayee
- फोटो : सोशल मीडिया
पहला भाषण भूल गए थे...
अटल बिहारी वाजपेयी अपने पहले भाषण में बीच में भूल गए थे। यह वाक्या वड़नगर के उस स्कूल के वार्षिकोत्सव में हुआ, जहां उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी हेडमास्टर थे। बगैर तैयारी किए मंच पर पहुंचे अटल लड़खड़ा गए और भाषण बीच में ही बंद करना पड़ा।
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अटल बिहारी वाजपेयी
बाजरे का पुआ और कढ़ी के शौकीन अटल
डॉ. प्रीतम सिंह के किताब में उल्लेख है कि अटल को बाजरे का पुआ और गुझिया बहुत पसंद हैं। ग्वालियर का चूड़ा तो उन्हें इतना अच्छा लगता था कि जब भी वे ग्वालियर जाते तो ढेर सा चूड़ा खरीद लाते। खीर, कढ़ी, पनेछा और गलरा उनकी पसंद रहे हैं।
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ATAL BIHARI VAJPAYEE
- फोटो : file photo
पीपल के पेड़ के नीचे बनने वाले मुंगौड़े खाने जरूर जाते
ग्वालियर के एमएलबी रोड पर पीपल के पेड़ के नीचे एक बुढ़िया स्वादिष्ट मुंगौड़े बनाया करती थी, जो अटल की खास पसंद रहे। अटल जब भी ग्वालियर जाते उस पेड़ के नीचे मुंगौड़े बनाने वाली बुढ़िया के मुंगौड़े खाए बिना नहीं लौटते।
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Atal Bihari Vajpayee
अटल जी का चंडीगढ़ से काफी लगाव था। अक्सर पार्टी का प्रदर्शन यहां ठीक रहता था मगर जब भी कम वोट पड़ते थे तो उनका सीधा सवाल होता, ‘क्यों भई चंडीगढ़ वाले नाराज क्यों हैं?’
जब गांवों में लाल डोरे के बाहर बने मकानों को तोड़ने के नोटिस आ रहे थे तो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पुरषोत्तम महाजन इस समस्या को लेकर वाजपेयी से मिले। उस समय वाजपेयी चंडीगढ़ स्थित पंजाब राजभवन आए हुए थे। वाजपेयी ने बस इतना ही कहा कि सरकार का काम मकान बनवाना है, तोड़ना नहीं।