दुनिया में एक इतनी बड़ी रसोई है, जहां एक घंटे में 25 हजार रोटियां बनती हैं और रोज लाखों लोग मुफ्त खाना खाते हैं। चौंक गए न जानकर, खुद देख लीजिए।
विज्ञापन
2 of 6
अमृतसर के गोल्डन टेंपल में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई
- फोटो : अमर उजाला
ये विशाल रसोई है, अमृतसर स्थित वर्ल्ड फेमस गुरुद्वारा गोल्डन टैंपल में। गुरुद्वारा के विशाल परिसर में मौजूद गुरु रामदास लंगर हाल में रोजाना 70 हजार से एक लाख तक लोग मुफ्त लंगर ग्रहण करते हैं। छुटि्टयों में ये आंकड़ा बढ़ जाता है। खाने का स्वाद भी लजीज होता है।
विज्ञापन
3 of 6
अमृतसर के गोल्डन टेंपल में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई
- फोटो : अमर उजाला
लंगर में ऑटोमेटिक रोटी मेकर मशीन से एक घंटे में 25 हजार रोटी बनती है। इसके अलावा रोजाना औसतन 70 क्विंटल आटा, 20 क्विंटल दाल, सब्जियां, 12 क्विंटल चावल लगता है। 500 किलो देसी घी इस्तेमाल होता है। सौ गैस सिलेंडर, 500 किलो लकड़ी की खपत होती है।
4 of 6
Amritsar golden temple kitchen
गोल्डन टैंपल में 24 घंटे लंगर चलता है। शुद्ध शाकाहारी भोजन तैयार करने वाले यहां के कर्मचारी नहीं, बल्कि सेवादार होते हैं, जोकि सेवाभाव से श्रद्धालुओं से लंगर तैयार करते हैं। बाद में उन्हें पंक्तियों में बैठाकर ग्रहण करवाते हैं। सभी कुछ काफी प्रेमभाव से होता है।
विज्ञापन
5 of 6
Amritsar golden temple kitchen
गुरु रामदास लंगर के मैनेजर का कहना है कि भोजन में क्या-क्या पकेगा, यह पहले से ही तय होता है। जैसे ही लोग पंक्तियों में बैठते हैं, तुरंत भोजन परोसना शुरू कर दिया जाता है। जैसे ही वे भोजन खाकर उठते हैं, बैटरी चालित मशीन से लंगर हाल की सफाई कर दी जाती है ताकि दूसरे लोग आकर बैठ सकें।
अमृतसर के गोल्डन टेंपल में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई
- फोटो : अमर उजाला
मैनेजर कहते हैं कि इतनी बड़ी रसोई से रोजाना खाना बनाने के लिए पैसा दुनिया में बसे लाखों सिख परिवार भेजते हैं। वे अपनी कमाई का दसवां भाग गुरुद्वारों की सेवा में अर्पित करते हैं। इन्हीं पैसों से गुरुद्वारों की प्रबंध और लंगर का खर्च चलता है। यहां इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुओं की क्वालिटी की परख की जाती है।