भगवान शिव के इस 'प्रसाद' से कैंसर, मिर्गी और ब्लड सैल का इलाज संभव है। एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है और इसकी क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। देखिए पूरी जानकारी।
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भांग के पौधे
भांग के पौधे में मिलने वाले कंपोनेंट सीबीडी का इस्तेमाल कैंसर और मिर्गी के इलाज में लाभदायक है। इस पर यूएसए मे शोध किया जा चुका है। पीयू में मेडिसन सिंपोजियम में भाग लेने आए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिसन के डायरेक्टर प्रोफेसर राम विश्वकर्मा ने बताया कि यह शोध सफल पाया गया है। भांग के पौधे में पाए जाने वाले सीबीडी कारक केइस्तेमाल से कैंसर से उठने वाले दर्द को रोका जा सकता है।
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भांग के पौधे
वहीं मिर्गी की बीमारी का इलाज भी इससे किया जा सकता है। इससे मिर्गी की बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। रक्त कणिकाओं में संक्रमण संबंधी बीमारी सिकल सेल एनीमिया से देश में दो करोड़ लोग पीड़ित हैं। इस बीमारी में ब्लड सेल का आकार गोल हो जाता है, जिससे खून के थक्के जमने लगते हैं। इससे शरीर को ऑक्सीजन मिलनी बंद हो जाती है। इस बीमारी का इलाज भांग के प्लांट से बनी दवा से किया जा सकता है।
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भांग के पौधे
नीति आयोग को पत्र देकर मांग की गई है कि भांग की खेती की इजाजत दी जानी चाहिए। इससे देश में कैंसर, मिर्गी, ब्लड सेल की बीमारी का इलाज सही तरीके से किया जा सकता है। इससे किसानों की वित्तीय स्थिति में सुधार आने के साथ लोगों को दवाएं सस्ते दाम पर उपलब्ध हो सकती हैं। कैंसर, मिर्गी की बीमारी में भी लोगों को दवाएं सस्ते दाम पर मिल जाएंगी। जम्मू -कश्मीर में इसकी खेती की इजाजत दी गई है।
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भांग के पौधे
उन्होंने बताया कि इसका शोध यूएसए में किया गया है। वहां पर 14 राज्यों में भांग की खेती की इजाजत मिल चुकी है। पीयू के यूआईपीएस द्वारा आयोजित सिंपोजियम में भाग लेने आए नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिसन के डायरेक्टर प्रोफेसर राम विश्वकर्मा ने बताया कि चंडीगढ़ में सर्वे में रक्त कणिकाओं में संक्रमण संबंधी बीमारी सिकल सेल एनिमिया से ज्यादातर यूपी और बिहार के लोग पीड़ित पाए गए हैं। इस रोग इलाज के लिए बनाई गई दवा को लेकर रिसर्च का काम पूरा चुका है । इसका क्लीनिकल ट्रायल छत्तीसगढ़ के एक अस्पताल में जारी है।
यह बोले डायरेक्टर: दवाई का ट्रायल रिसर्च के काम के बाद छत्तीसगढ़ में चल रहा है और चंडीगढ़ में बाहरी राज्यों से आए काफी लोगों में बीमारी के लक्षण हैं । दवाई के ट्रायल सफल रहने व बाकि प्रक्रिया पूरी होने के बाद इससे काफी फायदा होगा।
- प्रोफेसर राम विश्वकर्मा, डायरेक्टर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिसन, जम्मू