यूक्रेन संकट
- फोटो : अमर उजाला
ट्रेन लवीव की तरफ निकल रही थी। भारतीय स्टूडेंट्स को उठा उठाकर स्टेशन तक पहुंचाया, जिसकी जेब में पैसा नहीं, उसको पैसा दिया। जिसके पास खाने का सामान नहीं, उसको मुहैया करवाया। पहली रात में मैं 170 बच्चों को कीव से सुरक्षित निकालने में कामयाब हो गया। पांच साल से यूक्रेन में रहता हूं, यहां के हर इलाके से वाकिफ था। लंबे समय से कार की ट्रेडिंग के अतिरिक्त टैक्सी कंपनी चलाता रहा, कुछ देर कॉफी शॉप चलाई। आप यकीन मानिए, जितनी जमा पूंजी थी, सब विद्यार्थियों को निकालने पर लगा दी।