शहीद भगत सिंह के वंशज बोले, दूसरे देशों की करेंसी पर कई महान व्यक्तियों के फोटो प्रकाशित होते हैं। भारत में सिर्फ महात्मा गांधी की ही फोटो है। ऐसा क्यों?
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भगत सिंह के वंशज बोले, नोटों पर गांधी की ही फोटो क्यों?
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यहां भी अलग-अलग नोटों पर रानी लक्ष्मीबाई, छत्रपति शिवाजी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, लाला लाजपत राय, अशफाक उल्ला खां, वीर सावरकर, ऊधम सिंह जैसे शहीदों के फोटो प्रकाशित होने चाहिए। आजादी की लड़ाई में योगदान देने के बाद भी इन शहीदों को भारत में सम्मान नहीं मिला। भारतभूमि के इन शहीदों को सरकार से पूरा सम्मान दिलाया जाएगा।
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इन बातों का उल्लेख शनिवार को यहां पहुंचे शहीदों के वंशजों के साथ पहुंचे शहीद भगत सिंह के पौत्र यादवेंद्र सिंह संधू ने रेवाड़ी में किया। ऑल इंडिया शहीद भगत सिंह ब्रिगेड ने शहीदों को सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष का आगाज करने को इस कार्यक्रम का आयोजन किया।
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ऑल इंडिया शहीद भगत सिंह ब्रिगेड ने वीरभूमि से शहीदों को सम्मान दिलाने के लिए जमीनी संघर्ष का ऐलान किया है। शहीदों को सम्मान दिलाने के साथ ही ब्रिगेड उद्घोषित रूप से शहीद का दर्जा दिलाने के साथ सात मुद्दों पर काम कर रही है। शहीद भगत सिंह के पौत्र यादविंदर सिंह संधू की अगुवाई में शहीदों के वंशजों ने इसकी घोषणा की।
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पीएम मोदी से हुई मुलाकात के विषय में उन्होंने कि पूर्व में हुई मुलाकात में पीएम ने शहीदों की मदद करने का आश्वासन दिया है। पूर्ववर्ती सरकार में शहीदों के साथ भेदभाव हुआ है, पीएम मोदी अगर अपनी सरकार में देश के लिए 1787 से कुर्बान हुए लगभग 6 लाख शहीदों की लिस्ट तैयार कर उन्हें शहीद का दर्जा देती है तभी मोदी अन्य राजनेताओं से अलग दिखेंगे।
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इससे पहले शहीदों के वंशजों ने रेजांगला स्मारक स्थल पर शहीद सेनानियों को पुष्पचक्र अर्पित किए। कार्यक्रम में शहीद भगत सिंह के वंशज यादविंदर सिंह संधू, चंद्रशेखर आजाद के वंशज अमित आजाद, राजगुरु के वंशज सत्यशील राजगुरु और सुखदेव के वंशज अनुज थापर मौजूद रहे।
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संधू ने कहा कि भगत सिंह की जन्मशती पर केंद्र सरकार ने शहीद भगत सिंह की फोटो अंकित सिक्के टकसाल में तैयार कराए थे। तीन साल बाद भी ये सिक्के पब्लिक तक नहीं पहुंचे। कोलकाता टकसाल पहुंचे तो पता चला कि सिक्के काफी पहले तैयार हो गए थे, लेकिन सरकार ने मार्केट में नहीं उतारे। तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को इस संबंध में पत्र लिखने के बाद सिक्के मार्केट में आए लेकिन मात्रा सीमित होने के कारण किसी को पता ही नहीं चला।