कीर्ति की हिम्मत, उसका हौसला और जज्बा देखिए। एक हादसे में कीर्ति की रीढ़ की हड्डी टूट गई, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं टूटी। तस्वीरों में पूरा मामला। रिपोर्टः सुमित सिंह श्यौराण
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बेटी के हौंसले की दास्तां हैरान कर देगी आपको
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बठिंडा के मलोट निवासी चार बहनों में सबसे छोटी कीर्ति के सामने जिंदगी के सुनहरे सपने पूरे होने से चंद दिन बचे थे। वह भी प्रोफेसर बनकर मां-बाप के सपनों को साकार करना चाहती थी, लेकिन होनी को शायद कुछ ओर ही मंजूर था। एक एक्सीडेंट ने पल भर में कीर्ति के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। 2011 से अस्पताल तो कभी घर में बेड पर गुजारने के बावजूद घायल कीर्ति ने हौसला नहीं हारा। मजबूत इरादों की कीर्ति पीएचडी पूरी करना चाहती है। कीर्ति के कैरियर का फैसला अब पीयू सिंडीकेट की बैठक में लिया जाएगा।
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पीयू के इतिहास विभाग में कीर्ति को 9 जनवरी 2007 में पीएचडी में दाखिला मिल गया। मेधावी कीर्ति का 21 फरवरी 2011 को विभाग के ही एक सेमिनार में हिस्सा लेकर हॉस्टल लौटते हुए एक्सीडेंट हो गया। कीर्ति की रीढ़ की हड्डी में बुरी तरह चोटें लगी। उसे लगभग 2 साल तक अस्पताल में रहना पड़ा। दिल्ली में भी इलाज चला और कई ऑपरेशन भी हुए। कीर्ति की आवाज जाती रही और हाथ पैरों ने भी काम करना बंद कर दिया।
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कीर्ति को पीएचडी पूरी करने के लिए दो बार एक्टेंशन भी दिया गया। लेकिन हाथ और पैर न हिल पाने की वजह से वह निर्धारित समय में पीएचडी नहीं कर सकी। कीर्ति ने पीयू वाइस चांसलर को चिट्ठी लिखकर थीसिस जमा करने के लिए 31 दिसंबर 2015 का समय मांगा है। कीर्ति की गाइड डॉ. अंजू सूरी ने भी कीर्ति को समय देने की मांग की है। पीयू नियमों के तहत रिसर्च स्कॉलर को अधिकतम आठ साल का समय मिल सकता है। लेकिन कुलपति और सिंडीकेट विशेष परिस्थितियों में ही किसी कैंडीडेट को एक से दो साल का अतिरिक्त समय दे सकती है।
‘अमर उजाला’ से कीर्ति ने अपने बुरे दिनों को सांझा किया। उन्होंने बताया कि 21 फरवरी को वह दोस्त के साथ स्कूटर पर हॉस्टल जा रही थी। अचानक स्कूटर से गिरने से उसे गंभीर चोट लगी। कीर्ति ने कहा कि बुरे वक्त में भी उसके दोस्तों और उनकी गाइड डॉ. अंजू सूरी ने उनका पूरा साथ दिया।