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सरकार जागे न जागे, देश की महिलाएं अब जुल्म नहीं सहेंगी... ये लिखकर ले लो!

Sun, 13 Aug 2017 09:22 AM IST
टीम डिजीटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
महिलाओं से छेड़छाड़ और अन्य घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हालात रोज बदतर हो रहे हैं। 2 से 3 साल तक की बच्चियां दरिंदों का शिकार हो रहीं हैं लेकिन अब बस!
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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
बच्चों को समान हक दो। सबको मिलकर सोच बदलनी होगी। खुद को अच्छा नागरिक बनाना होगा, तभी समाज बदलेगा। अच्छा समाज से ही अच्छा भारत बनेगा और अच्छा समाज बेटियों से है बेटों से नहीं।
- जगदीश दीवान 
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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
जगदीश दीवान जैसे कई लोग शुक्रवार देर रात चंडीगढ़ की सड़कों पर दिखे। ये सभी हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस की बेटी के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना का विरोध कर रहे थे। यह मार्च रोज गार्डन से रात करीब दस बजे शुरू होकर एफेल टावर तक गया। इसकी शुरुआत नारेबाजी के साथ हुई। 

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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
बेटियां आज समाज के हर वर्ग से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। लड़के अगर देर रात तक सड़कों पर घूम सकते हैं तो लड़कियां भी घूम सकती हैं। उनके घूमने पर सवाल क्यूं उठाया जाता है। ऐसे लोगों को बताने का वक्त आ गया है कि महिलाएं कमजोर नहीं हैं।
- डॉ. दीपा
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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
महिलाओं को रोजाना हर जगह चाहे आफिस हो या घर, बाजार हो या कोई कार्यक्रम हर जगह ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। बस अब बहुत हुआ, ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए अब एक आवाज उठी है और इसे हम बुलंद करके रहेंगे।
- शालिनी मालवीय
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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
इस मार्च में मैं उन सभी के साथ हूं जो रोजाना इस तरह की घटनाओं की शिकार होती हैं। हमारी भी बहनें और परिवार की अन्य महिलाएं रोजाना घर से बाहर निकलती हैं। उन सभी को बेखौफ आजादी मिले, इसके लिए मैं इस मार्च को सपोर्ट करने आया हूं।
- यशवीर सिंह संधू
 
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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
अब समय बदल चुका है। काफी कामकाजी महिलाएं रात के समय घर लौटती हैं। ऐसी स्थिति में उनके साथ होने वाली घटनाओं को रोकना आवश्यक है। आवश्यकता इस बात की भी है इस स्मार्ट सिटी की सड़कें अंधेरे में न डूबी रहें और ज्यादा से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे की हद में सिटी हो। 
इंदु धवन, पंजाब यूनिवर्सिटी।

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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
यह ‘बेखौफ आजादी मार्च’ महिलाओं की आजादी के लिए है। दिन हो या रात, महिलाओं के लिए आजादी हमेशा होनी चाहिए। हमारा मार्च इसीलिए था। चंडीगढ़ में क्राइम अचानक बढ़ने लगा है। क्राइम की उत्पत्ति को खत्म करना होगा। प्रभावशाली लोग इतनी आसानी से मामलों को दबा लेंगे, ऐसा नहीं हो सकता है।
एमी, आयोजक।

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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
 महिलाओं के साथ कितना गलत हो रहा है सभी जानते हैं। वर्णिका का मामला हाईप्रोफाइल है और इसीलिए यह इतना हाईलाइट हो गया, पर न जाने कितने ऐसे मामले आते हैं जो दबे ही रह जाते हैं। जरा इन मामलों पर भी नजर डालनी चाहिए। 
रेनू, पंचकूला।
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Chandigarh's Bekhauf Azadi March
अब समय बदल चुका है। काफी कामकाजी महिलाएं रात के समय घर लौटती हैं। ऐसी स्थिति में उनके साथ होने वाली घटनाओं को रोकना आवश्यक है। आवश्यकता इस बात की भी है इस स्मार्ट सिटी की सड़कें अंधेरे में न डूबी रहें और ज्यादा से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे की हद में सिटी हो। 
इंदु धवन, पंजाब यूनिवर्सिटी।
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