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10 के सिक्के लेने से मना किया तो वो होगा, जो इस मैनेजर के साथ हुआ

Wed, 23 Nov 2016 09:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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10 रुपये का सिक्का
अगर आपने भी 10 रुपये का सिक्का लेने से मना किया तो वहीं होगा, जो इस मैनेजर के साथ हुआ। जानिए क्या है पूरा माजरा?
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
मामला चंडीगढ़ का है। पेट्रोल पंप कर्मी ने ऑटो चालक से दस दस के सिक्के लेने से मना किया तो ऑटो चालक ने 100 नंबर पर फोन कर पुलिस बुला ली। पुलिस पंप मैनेजर व ऑटो चालक को सेक्टर 19 पुलिस थाने ले गई। जहां पर पंप मैनेजर ने मजाक की बात कहकर जान छुड़ाई और समझौता कर लिया।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
जानकारी के मुताबिक सोमवार को सुबह ऑटो चालक राजकुमार सेक्टर 21 स्थित कपूर सर्विस स्टेशन पर ऑटो में एलपीजी डलवाने गया था। राजकुमार ने आरोप लगाया कि अभी कर्मचारी ने गैस भरने के लिए पाइप ऑटो में लगाई ही थी। तभी उसने पेमेंट के लिए दस दस के सिक्के गिनने शुरू कर दिए। सिक्के गिनते देख कर्मचारी ने ऑटो से पाइप निकाल ली और कहा कि वह दस दस के सिक्के नहीं लेगा।

 

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दस रुपये के सिक्के की पहचान
राजकुमार ने बताया कि उसने ऑटो में 470 रुपये की गैस भरवानी थी। उसके पास 170 रुपये के दस दस के सिक्के थे। बाकी के नोट थे।
इस कारण सर्विस स्टेशन के कर्मचारी ने दस दस के 170 रुपये के सिक्के लेने से साफ इंकार कर दिया। कर्मचारी के सिक्के न लेने की शिकायत पुलिस कंट्रोल रूम में दे दी। सूचना मिलते ही सेक्टर 19 थाने से जांच अधिकारी केहर सिंह मौके पर पहुंचे।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
पुलिस ऑटो चालक व मैनेजर को पुलिस थाने ले आई। इसके बाद पुलिस ने बयान दिया कि उन्होंने ऑटो चालक राजकुमार के बयान दर्ज किए। सर्विस सेंटर के मैनेजर ने पुलिस से कहा कि कर्मचारी ने मजाक मे दस दस के सिक्के लेने से मना किया था। बाद में थानेे में दोनों पक्षों में समझौता कर लिया। इसके बाद सेक्टर 19 पुलिस स्टेशन में सिर्फ डीडीआर दर्ज कर दोनों को जाने दिया।

 
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए। सिक्के लेने से मना करने पर रोहतक में डीएम ने 14 दूध की डेयरियां, 6 इलेक्ट्रॉनिक की दुकानें, 8 सर्राफ की दुकानें, 16 सब्जी की दुकानें, 5 किरयाना दुकानें, 8 मेडिकल की दुकानें सील कर दीं। लोगों ने इनके खिलाफ आरबीआई में शिकायत दी और कारवाई के तहत दुकानों को सील करने के निर्देश आ गए।
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दस रुपये के सिक्के की पहचान
रोहतक में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की एक शाखा के कैशियर भी ऐसे ही एक मामले में कार्रवाई भुगत रहे हैं। उन्होंने 10 रुपए के सिक्के लेने से मना करना की दिया था। मामला 3 अक्तूबर का था और अनीता नाम की महिला ने आरबीआई को इसकी शिकायत दे दी थी। उसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई, जो अभी तक भी चल रही है।

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दस रुपये के सिक्के की पहचान
आरबीआई के मु​ताबिक, दस रुपये का सिक्का चलन से बाहर नहीं किया है। 10 रुपए का सिक्का पूरी तरह से वैध है, लोग लेनदेन में इसका खुलकर इस्तेमाल करें। इसे लेने से मना करना भारतीय मुद्रा का अपमान है। अगर कोई सिक्के लेने से मना करता है तो उसे जेल हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने पर पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ चालान करके न्यायालय से सजा दिला सकती है।

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दस रुपये का सिक्का
यह है सजा का प्रावधान: नोट या सिक्के का जाली मुद्रण, जाली नोट या सिक्के चलाना और सही सिक्कों को लेने से मना करना भारतीय दंड संहिता की धारा 489ए से 489इ के तहत अपराध है। इन धाराओं के तहत किसी विधिक न्यायालय द्वारा आर्थिक दंड, कारावास अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है। 17 साल की सजा या 20000 रुपये का जुर्माना या फिर दोनों सजा दी जा सकती है।

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दस रुपये का सिक्का - फोटो : demo pic
एक बैंक अधिकारी ने बताया कि अगर आप के भी शहर या कस्बे में भी ऐसा हो रहा हो तो उसका वीडियो या ऑडियो बना कर इलाके के डीएम ऑफिस या थाने में बताएं। असली दस रुपए का सिक्का डबल डाई से तैयार किया जाता है। नकली सिक्के में भी डबल डाई का प्रयोग किया गया है, लेकिन ध्यान से देखने पर इन्हें पहचाना जा सकता है। असली सिक्कों में पीले भाग का रंग हलका हैं, जबकि नकली में पीला भाग ब्राइट है।
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दस रुपये का सिक्का
असली सिक्के में 10 का अंक दो धातुओं के बीच में है और 10 पट्टी बनी हैं। नकली में 10 का अंक सिल्वर धातु के बीच में है और 15 पट्टी हैं। असली सिक्के में भारत और इंडिया अलग-अलग लिखा है। नकली सिक्के में भारत और इंडिया एक साथ है। असली सिक्का शार्प है, जबकि नकली सिक्का थोड़ा खुरदरा है और साइज में भी फर्क है। नकली सिक्के छोटे हैं और इनका वजन भी कम है। नकली सिक्के का पीला भाग जोर देने पर निकल सकता है। जबकि असली में ऐसा नहीं है।
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