देखिए एक शख्स, जो कभी साइकिल पर गली गली घूमकर च्यवनप्राश बेचा करता है। आज वह 10 हजार करोड़ के एम्पायर का मालिक है। जानिए कैसे?
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baba ramdev
- फोटो : अमर उजाला
हम बात कर रहे हैं, बाबा रामदेव की। इनकी बनाई पतंजलि कंपनी का सालाना टर्नओवर 10 हजार करोड़ के पार पहुंच चुका है। यह अपने आप में एक बड़ी बात है और इसके पीछे बाबा रामदेव की कड़ी मेहनत लगन और कुछ कर गुजरने का जज्बा है। ये वही इंसान है, जो कभी साइकिल चलाया करता था और योगगुरु बने जिसे 22 साल हो गए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
पूरी दुनिया को योग का पाठ पढ़ाने वाले बाबा रामदेव का असली नाम राम कृष्ण यादव है। करीब 50 साल के बाबा का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अली सैयद्पुर गांव में हुआ। बचपन यहीं पर बीता। बचपन का नाम रामकृष्ण था। खबरें मिली हैं कि बचपन में ही शहीद भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल की तस्वीरें देखकर रामदेव क्रांतिकारी बनने की सोचा करते थे। किसे पता था कि ये एक दिन देश में योग की क्रांति लाएंगे?
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- फोटो : अमर उजाला
बाबा रामदेव को शुरू से ही योग में दिलचस्पी थी। योग के प्रति लगाव के कारण एक दिन उन्होंने घर-बार छोड़कर ऋषिकेश जाने की ठान ली। आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बल्देवजी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली। युवावस्था में संन्यास लिया और पहले वाला रामकृष्ण, स्वामी रामदेव के नये रूप में बदल गया। रामदेव ने कालवा गुरुकुल, जींद जाकर नि:शुल्क योग सिखाया उसके बाद हिमालय में ध्यान और धारणा का अभ्यास करने निकल गए।
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बाबा रामदेव वहां से सिद्धि प्राप्त कर प्राचीन पुस्तकों व पाण्डुलिपियों का अध्ययन करने हरिद्वार आकर कनखल के कृपालु बाग आश्रम में रहने लगे। यहीं उन्हें अपने जीवन का निर्णायक मोड़ मिला। एक धार्मिक टीवी चैनल ने उन्हें योग के एक प्रोग्राम में फीचर करना शुरू किया। बाबा ने टीवी के माध्यम से जनता तक योग की शक्ति को पहुंचाया। यहीं से बाबा रामदेव ने योग को एक बड़ा ब्रांड बनाने की शुरुआत कर दी।
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रोहतक में बाबा रामदेव
दिल्ली में बाबा का योग शिविर ऑर्गनाइज कराने वाले एक शख्स ने रामदेव को 50 हजार रुपए दिए और उनसे मलेरिया और काला अजर की आयर्वेदिक मेडिसिन बनाने की बात कही। उस वक्त ये दोनों बीमारियां असम के कई हिस्सों में फैली हुई थीं। ये पहला अवसर था जब रामदेव और बालकृष्ण ने पहली बार दवाएं बनाईं और उन्हें असम के डिब्रूगढ़ और उदलगिरी ले गए।
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रोहतक में बाबा रामदेव
हालांकि यहां बाबा रामदेव को विरोध का भी सामना करना पड़ा लेकिन, जब लोगों को लगा कि वो गरीबों और बीमारों की सेवा करना चाहते हैं तो उनके काम की सराहना हुई। असम से लौटने के बाद रामदेव और बालकृष्ण हरियाणा में बीमार लोगों का इलाज करने लगे। इस दौरान दोनों साइकिल से घूम-घूमकर च्यवनप्राश भी बेचते थे।
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बाबा रामदेव
1995 में जिवराज पटेल ने 3.5 लाख और बाबा के दूसरे शुभचिंतकों ने 1.5 लाख रुपए बाबा और बालकृष्ण को डोनेट किए। इन पैसों से दोनों ने हरिद्वार के कनखाल में 'दिव्य फॉर्मेसी' नाम से एक आयुर्वेदिक हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर शुरू किया। 2001 में बाबा पहली बार टीवी पर नजर आए। संस्कार चैनल पर उनका एक शो आना शुरू हुआ। सुबह 6.45 पर आने वाले 20 मिनट के योग प्रोग्राम ने बाबा को घर-घर में पहचान दिला दी।
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बाबा रामदेव
तीन साल बाद रामदेव 'संस्कार' से ज्यादा पापुलर चैनल 'आस्था' पर नजर आने लगे। इस चैनल ने बाबा के योगा सेशन को लाइव करना शुरू किया। आज 'आस्था' चैनल पर पंतजलि का लगभग पूरी तरह कंट्रोल है, जबकि 'संस्कार' चैनल के शेयर में भी पतंजलि की हिस्सेदारी है। बाबा के बिजनेस का ये सिलसिला अब कॉस्मेटिक से लेकर किराना के अलावा हर तरह के घरेलू प्रोडक्ट तक पहुंच चुका है।
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बाबा रामदेव
बाबा रामदेव जल्द ही 'स्वदेश जींस' भी लॉन्च करने वाले हैं। 2006 में बाबा के पतंजलि योगपीठ की स्थापना हरिद्वार में हुई। इसी साल बाबा पहली बार इंग्लैंड गए और चार योग शिविर आयोजित किए। 2007 में वे पहली बार योग शिविर लगाने अमेरिका गए और 4 योग शिविर लगाए। 2009 में बाबा ने पतंजलि आयुर्वेद और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना की।
साल 2006 में जब रामदेव और बालकृष्ण ने पतंजलि की स्थापना की तो कुछ ही लोगों का ध्यान इस ओर गया होगा, लेकिन 2009 में हरिद्वार से 20 मील दूर 150 एकड़ की जमीन पर फैक्ट्रियां लगनी शुरू हो गईं। महज 10 साल में उन्होंने पतंजलि को 5 हजार करोड़ तक पहुंचा दिया। वर्ष 2016-17 में यह लक्ष्य 10 हजार करोड़ होने का अनुमान था, जिसे पूरा कर लिया गया है।