सरस्वती नदी को अब वही शख्स निर्मल बनाएगा, जिसने काली बेई को साफ किया और जिन्हें 'हीरो ऑफ एन्वायरन्मेंट' के नाम से जाना जाता है। इन्हें अपने योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है।
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पद्मश्री संत सींचेवाल
ये हैं पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल, जो अब ज्ञान की देवी सरस्वती के नाम से प्रवाहित होने वाली नदी को दूषित होने से बचाने में योगदान देंगे। इन्होंने गुरुनानक देव को अंतर्ज्ञान देने वाली पंजाब की कालीबेई का कायाकल्प करने में विशेष भूमिका निभाई थी। बता दें कि भारत की पौराणिक नदी सरस्वती को दूषित होने से बचाने के लिये हरियाणा सरकार बलबीर सिंह सीचेवाल का मार्गदर्शन लेकर काम करेगी। 'इको बाबा' के नाम से विख्यात बलबीर सिंह ने इसकी पुष्टि अमर उजाला से विशेष बातचीत में की।
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बलबीर सिंह सीचेवाल
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उनसे संपर्क कर सरस्वती नदी को दूषित होने से बचाने के लिये सुझाव मांगें हैं। संत सीचेवाल ने मुख्यमंत्री के इस आग्रह के बाद दिल्ली अंबाला जीटी रोड पर पिपली में सरस्वती सेतु के निकट और गांव खानपुर कौलिया के नजदीक सरस्वती नदी का निरीक्षण किया। इस दौरान सीचेवाल के साथ सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि सरस्वती में जिन स्रोत से गंदगी पहुंचती है, वह उनका निरीक्षण कर सरकार को रिपोर्ट देंगे, ताकि इस समस्या का हल हो सके।
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संत बलबीर सिंह सीचेवाल
- फोटो : amarujala
बता दें कि पंजाब में वर्ष 2000 में कार सेवा शुरू करके संत सीचेवाल ने गुरु नानक देव जी से जुड़ी ऐतिहासिक नदी काली बेई का कायाकल्प करने में विशेष भूमिका निभाई थी। उनके प्रयास से ही औद्योगिक व मानवीय प्रदूषण से जाम 160 किलोमीटर लंबी काली बेई साफ हो पाई थी। आज काली बेई देश में न केवल एक रोल माडल के रुप में देखी जाती है, बल्कि आज वह जगह एक पिकनिक स्थल के रुप में विकसित हो चुकी है। लंबे अर्से से सरस्वती नदी का भी यही हाल है। इसकी सफाई की मुहिम कई बार चली, लेकिन फायदा नहीं हुआ।
प्रदेश सरकार ने बनाया है सरस्वती हैरिटेज बोर्ड
हरियाणा में भाजपा की सरकार बनते ही सरस्वती हैरिटेज बोर्ड की स्थापना की गई थी। बोर्ड की स्थापना के साढ़े चार साल में सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने के लिए हरियाणा-हिमाचल सीमा पर डैम बनाने की योजना बनी। यह डैम सरस्वती के उद्गम स्थल आदी बद्री मंदिर के निकट बनेगा। सरस्वती नदी का जल फिर से प्रवाहित हो, इसके लिये हरियाणा सरकार प्रयासरत है। इसके लिये प्रदेश सरकार दो एमओयू (समझौता ज्ञापन) साइन कर चुकी है। जलविद्युत परियोजनाओं के लिए हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड, सिंचाई और जल संसाधन विभाग और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआइएच) में त्रिपक्षीय समझौता भी हो चुका है।