बनारस में नाश्ता करते अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : file photo
सवेरे सवेरे यारों से मिलने बन ठन के निकले हम
सवेरे सवेरे यारों से मिलने घर से दूर चलें हम
रोके से न रुके हम, मर्जी से चलें हम
बादल सा गरजें हम, सावन सा बरसे हम
सूरज सा चमकें हम, स्कूल चलें हम...