बहादुर बेटे के जज्बे को सलाम, एक घटना के बाद विकास कृष्ण छोड़ चुके थे बॉक्सिंग, लेकिन जुनून कम नहीं हुआ। वापसी की, लेकिन अब एशियन गेम्स में चोट लग गई है, पर एक अनोखा रिकॉर्ड जरूर बनाया है।
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मुक्केबाज विकास कृष्ण
बात हो रही है, 26 वर्षीय भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव की, जिन्होंने जकार्ता में एशियन गेम्स 2018 में 75 किलोग्राम वेट की कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। वे गोल्ड मेडल जीत सकते थे, लेकिन क्वार्टर फाइनल में विकास को बाई पलक पर चोट लगने के कारण सेमीफाइनल खेलने से अयोग्य करार दिया गया है। 31 अगस्त को मुकाबला होना था, लेकिन चोट के चलते वे बाहर हो गए और ब्रॉन्ज से ही संतोष करना पड़ा।
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मुक्केबाज विकास कृष्ण
3 एशियाई खेलों के पदक विजेता
विकास भले ही सेमीफाइनल में नहीं उतरे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने नाम एक रिकॉर्ड दर्ज कर दिया है। वह लगातार 3 एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बन गए हैं। उन्होंने ग्वांग्झू में 2010 में लाइटवेट 60 किग्रा में गोल्ड जीता था । इसके बाद 2014 में इंचियोन में मिडिलवेट में ब्रॉन्ज मेडल देश को दिलाया। उन्हें प्री क्वार्टर फाइनल में चोट लगी थी और क्वॉर्टर फाइनल में उनका घाव गंभीर हो गया।
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मुक्केबाज विकास कृष्ण
कभी छोड़ दी थी बॉक्सिंग
विकास कृष्ण ने 2012 में हुए लंदन ओलिंपिक के बाद विकास कृष्णन यादव ने बॉक्सिंग छोड़ने का मन बना लिया था। उन्होंने रिंग से दूरी बना ली। 18 महीने तक बॉक्सिंग नहीं की।अब वो हरियाणा पुलिस में नौकरी के लिए मेहनत में जुट गए थे। विकास के अनुसार, उस समय मेरी उम्र तक सिर्फ 20 साल थी। मुझे बॉक्सिंग में करियर नजर नहीं आ रहा था। मैं ये खेल छोड़ने का मन बना चुका था। सबह 9 बजे उठता था, देर रात सोता था। ट्रेनिंग के लिए भी सीरियस नहीं था, पर मैं बॉक्सिंग से दूर होने के बाद भी खेल को भुला नहीं पा रहा था।
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मुक्केबाज विकास कृष्ण
क्या हुआ था लंदन ओलिंपिक में
2012 के लंदन ओलिंपिक खेलों में विकास मेडल जीतने को लेकर काफी कॉन्फिडेंट थे। 20 साल के विकास ने तब अमेरिकन बॉक्सर एरॉल स्पेन्स को हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली थी। वो अपनी इस सफलता का जश्न मना रहे थे कि कुछ ही पलों में उन्हें जबरदस्त झटका लगा। बॉक्सिंग गवर्निंग बॉडी AIBA ने रिजल्ट को पलटते हुए एरॉल को विनर डिक्लेयर कर दिया। वीडियो फुटेज देखने के बाद विकास द्वारा किए गए फाउल के बदले एरॉल को चार एक्स्ट्रा प्वाइंट दे दिए गए थे। विकास इस झटके से पूरी तरह टूट गए। वो यकीन नहीं कर पा रहे थे कि उनका ओलिंपिक ड्रीम टूट चुका है।
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मुक्केबाज विकास कृष्ण
लौटा तो रियो में खेलने का मौका मिला
18 महीने के वक्त ने मुझे सोचने का मौका दिया था। मैं फिर इस खेल के लिए सीरियस हुआ। मैंने इस खेल की मुश्किलों पर बारीकी से गौर किया और उससे ऊपर उठने की कला सीखी। अब मैं इस खेल के झटकों को और बेहतर तरीके से झेलने के लिए तैयार था। फिर मैंने रियो में खुद को साबित करने की ठान ली। रियो ओलंपिक में खेलने का मौका भी मिला, पर यहां 75 किलोग्राम वेट की कैटेगरी में क्वार्टर फाइनल में बाहर हो गया। स्टार बॉक्सर विजेंदर सिंह मेरे आइडल हैं। मैं विजेंदर भाई की स्टाइल, रुटीन और परफॉर्मेंस को फॉलो कर रहा हूं।
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मुक्केबाज विकास कृष्ण
10 फरवरी, 1992 को हिसार जिले के गांव सिंघवा में कृष्ण यादव व श्रीमती दर्शना के घर पैदा हुए विकास भिवानी के वैश्य कॉलेज के विद्यार्थी हैं और आजकल उनका परिवार भिवानी के सेक्टर 13 में रहता है। विकास के पिता कृष्ण यादव बिजली निगम में स्टैनोग्राफर के पद पर कार्यरत हैं और मां श्रीमती दर्शना गृहणी हैं। मुक्केबाजी को कैरियर बनाने के सवाल पर विकास का कहना है कि वह एक दिन भिवानी स्टेडियम में घूमने गए तो वहां बच्चों और युवाओं को बॉक्सिंग का अभ्यास करते देखा और उसके मन में भी बॉक्सिंग सीखने की ललक पैदा हुई। इस बारे में जब उसने घर आकर मां-पिताजी से बात की तो उन्होंने भी सहमति दे दी।
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मुक्केबाज विकास कृष्ण
शौक के तौर पर शुरू किये बॉक्सिंग के अभ्यास में जब विकास अपने मुक्के का जौहर दिखाने लगा तो उसे कोच और परिवार ने प्रोत्साहित किया। अपनी कड़ी मेहनत, परिवार के समर्थन और कोच के कुशल निर्देशन के परिणाम स्वरूप बहुत छोटी उम्र में ही उसने 17 वर्ष से भी कम आयु में यूथ विश्व चैम्पियन बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। उसके बाद तो उन्होंने मुड़ कर ही नहीं देखा। विकास भारत के एकमात्र ऐसे मुक्केबाज हैं जिन्होंने एशियाड में गोल्ड और विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत कर अपने देश को गौरवान्वित किया है।
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मुक्केबाज विकास कृष्ण
विकास कृष्ण ने 2018 में ही गोल्ड कोस्ट में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वह 2011 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। इसके अलावा उनके नाम एशियन चैंपियनशिप के मिडिलवेट वर्ग में एक सिल्वर (2015 बैंकॉक) और एक ब्रॉन्ज मेडल (2017 ताशकंद) दर्ज है। साल 2010 के ग्वांगझू में आयोजित एशियन गेम्स में विकास कृष्ण ने भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। भारत ने 1998 में डिंको सिंह के स्वर्ण पदक के बाद से एशियाई खेलों में कोई सोने का तगमा नहीं जीता था। 12 साल बाद पदक का ये अकाल विकास यादव ने खत्म किया था।
इसके बाद साल 2014 के इन्चियोन में भी उन्होंने देश के लिए कांस्य जीता। साल 2010 में आईबा द्वारा आयोजित यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी विकास कृष्ण यादव ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। विकास कृष्ण यादव भारत की तरफ से दो बार ओलिंपिक में हिस्सा ले चुके हैं। यूथ एशियन मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक पर कब्जा कर सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज का खिताब जीत चुके हैं। यूथ ओलम्पिक में रजत पदक जीत वे 2010 के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय मुक्केबाज अन्डर 17 और अन्डर 19 में अपने भार वर्ग में विश्व चैम्पियन भी रह चुके हैं।