23 साल की एयरहोस्टेस जिसके कई सपने थे, लेकिन 360 लोगों को बचाने के लिए वो मौत से भी नहीं भागी, हंसते-हंसते गले लगा लिया, पर उसकी जिंदगी के कुछ और सच भी हैं, पढ़ें
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
बात हो रही है अशोक चक्र विजेता नीरजा भनोट की। आज 7 सितंबर को नीरजा का जन्मदिन है और इससे दो दिन पहले 5 सितंबर 1986 को आतंकियों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया था। दम तोड़ने से पहले नीरजा ने हाइजैक हुई फ्लाइट पैन एएम के 360 यात्रियों और 13 क्रू मेंबर्स की जान बचाई थी।
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
नीरजा की बहादुरी को सलाम करते हुए भारत सरकार ने उन्हें अशोक चक्र से नवाजा था। नीरजा ऐसी पहली सबसे युवा महिला थीं, जिन्हें अशोक चक्र मिला (मृत्यु के उपरांत)। बता दें कि अशोक चक्र भारत का शांति के समय का सबसे ऊंचा वीरता का पदक है। यह युद्ध के समय मिलने वाले परमवीर चक्र के बराबर ही माना जाता है।
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नीरजा भनोट की कहानी
- फोटो : File Photo
अशोक चक्र के साथ-साथ नीरजा को फ्लाइट सेफ्टी फाउंडेशन हिरोइजम अवॉर्ड, यूएसए, तमगा-ए-इंसानियत-पाकिस्तान, जस्टिस फॉर क्राइम्स अवॉर्ड, यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नीज ऑफिस फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया, स्पेशल करेज अवॉर्ड, यूएस गवर्नमेंट और इंडियन सिविल एवियेशन मिनिस्ट्रीज अवॉर्ड जैसे सम्मानों से भी नवाजा गया।
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neerja
नीरजा का जन्म 7 सितंबर 1963 को चंडीगढ़ में हुआ। पिता हरीश भनोट मुंबई के पत्रकार थे और उनकी मां रमा भनोट हाउसवाइफ। मां-बाप प्यार से उसे 'लाडो' बुलाते थे। दो भाई हैं अनीश भनोट और अखिल भनोट, जिन्होंने बहन की याद में एक किताब लिखी और अगस्त 2018 में उसका विमोचन किया था।
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
मार्च 1985 में 21 साल की उम्र में एक बिजनेसमैन से नीरजा की शादी हो गई थी और वह पति के साथ वेस्टर्न एशिया चली गई थीं। शादी के पहले बात हो गई थी कि इसमें दहेज नहीं दिया जाएगा। लेकिन बाद में उन्हें इसके लिए ताने मिलने लगे। ससुराल वाले कहते थे कि एक गरीब आदमी भी अपनी बेटी के लिए कुछ देता है।
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neerja
पति की प्रताड़ना और दहेज की मांग से तंग आकर वह वापस मुंबई आ गई थीं। 1986 में मॉडल के रूप में उन्होंने कई TV और प्रिंट ऐड करना शुरू कर दिए थे। वह बेंजर सारीज, बिनाका टूथपेस्ट, गोदरेज बेस्ट डिटरजेंट, वैपरेक्स और विको टरमरिक क्रीम जैसे उत्पादों की मॉडल रह चुकी हैं।
नीरजा को बचपन से ही हवाई जहाज में बैठने का शौक था तो उन्होंने पैन अमेरिकन एयरवेज में नौकरी कर ली। ट्रेनिंग के दौरान नीरजा को एक कोर्स में दाखिला लेना पड़ा तो उनकी मां घबरा गईं और उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए कहा, लेकिन नीरजा ने जवाब दिया कि अगर सारी मांएं ऐसा सोचेंगी तो देश के भविष्य का क्या होगा।