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दशहरे की वो मनहूस शाम, रावण तो जला लेकिन बिछ गई थीं 59 लाशें, जानिए क्या हुआ था उस दिन

Tue, 08 Oct 2019 05:04 PM IST
ajay kumar अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
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बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा पूरे देश में हर्ष के साथ मनाया जाता है। लेकिन इसी दिन पिछले साल कुछ ऐसा हुआ कि पूरे देश का दशहरा उत्सव मातम में बदल गया। आज भी लोग इस हादसे को यादकर कांप उठते हैं। जिसने भी वो मंजर देखा वो दहल उठा। आइए जानते हैं अमृतसर में हुए इस रेल हादसे के बारे में...

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फाइल फोटो - फोटो : PTI
बीते वर्ष अमृतसर के जोड़ा फाटक पर दशहरा का उत्सव चल रहा था। लोग रेल ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। एक तेज रफ्तार ट्रेन अपने साथ मौत लेकर आई। ट्रेन गुजरते ही पूरे शहर में मातम पसर गया। जंगल में आग की तरह पूरे देश में खबर फैल गई कि अमृतसर में बड़ा रेल हादसा हुआ है। इस हादसे ने 59 जिंदगियां उजाड़ दीं। दर्जनों लोग घायल हुए। मरने वालों में बच्चे, बूढ़े, जवान और महिलाएं शामिल थीं।
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Amritsar train accident - फोटो : PTI
कई परिवारों पर गाज गिर गई, क्योंकि उनके अपने हमेशा के लिए जुदा हो गए। लेकिन इन परिवारों के हालात एक साल बाद नहीं सुधरे परिवारों को आर्थिक संकट का समाना करना पड़ रहा है। कई परिवारों का सामाजिक ताना-बाना ही बिगड़ गया है। इनमें से कई परिवार दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हो गए हैं। कई परिवारों के चिराग, किसी का सुहाग तो किसी का भाई इस घटना के भेंट चढ़ गया। हादसा इतना भयानक था कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी थी।

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अमृतसर ट्रेन हादसा के बाद विलाप करते पीड़ितों के परिजन की फाइल फोटो - फोटो : PTI
एक वर्ष बाद भी इन परिवारों में अपनों को खोने के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है। जो लोग इस हादसे में मारे गए उनमें से कई घरों में पंजाब सरकार द्वारा दी गयी मुआवजे की पांच लाख की राशि ने पारिवारिक सदस्यों के बीच झगड़े पैदा कर दिए। कई पारिवारिक सदस्यों ने पांच लाख की खातिर अपनों के साथ ही धोखा किया। 
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पिछले साल रावण दहन की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सास को छोड़ मायके चली गई है बहू

रावण की भूमिका निभाने वाले दलबीर कई लोगों की जान बचाने के बाद मौत का शिकार हो गए। उनकी पत्नी नवनीत कौर उनकी मां को अकेला छोड़कर मायके चली गई है। पांच लाख की राशि में से कुछ पैसे दलबीर कौर की मां को मिले थे। नवनीत कौर शेष पैसे लेकर मायके चली गई। बॉबी पांडेय भी इस रेल हादसे का शिकार हुआ था। उसका परिवार आज तक हादसे से उभर नहीं सका है। उसके पिता बेटे को याद करते हैं तो आज भी आंसू छलक पड़ते हैं। हादसे का शिकार हुए वासु की मां बेटे की फोटो को देख कर जोर-जोर से रो पड़ती हैं।
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रावण की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बलदेव के परिजनों को अब भी इंतजार मदद का
 

हादसे में गंभीर रूप से जख्मी हुआ एक शख्स ऐसा भी था, जो महीनों तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा। 23 फरवरी 2019 को उसने दम तोड़ा। हादसे में मारे गए सभी लोगों को पंजाब सरकार ने मुआवजा राशि जारी किया, लेकिन इस शख्स के परिवार को कुछ नहीं मिला। मृतक का नाम न तो घायलों की सूची में दर्ज था और न ही मृतकों की। इस शख्स का नाम बलदेव था।
 
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मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला
उनके पुत्र राजेश कुमार के अनुसार ट्रेन की चपेट में आने से उनके पिता की कमर कई जगह से टूट गई थी। वह उन्हें एक के बाद दूसरे अस्पताल में ले गए, लेकिन वह स्वास्थ्य लाभ न पा सके। परिवार का ध्यान पिता के इलाज पर केंद्रित था। उनकी मौत के बाद सरकारी रिकॉर्ड में मृतकों की सूची में उनका नाम दर्ज करवाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी। बलदेव की पत्नी कांता रानी का कहना है कि उनके देहांत के बाद परिवार टूट गया है। दाने-दाने को तरस रहे हैं। भाई-बहनों से पैसे मांगकर घर का चूल्हा जला रही हूं।
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