एक मां ने अपने हंसते-खेलते बेटे को टूर पर भेजा और वह वापस नहीं आया। अब उस मां के कलेजे पर क्या बीत रही होगी, शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
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‘कित्थे गया मेरा मीतो, कोई तां लिया दिओ’
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वो मां बस रोती हुई इतना ही कह पा रही थीं, ‘कित्थे गया मेरा मीतो, कोई तां लिया दिओ। ऐसा देखने को मिला अकाली पार्षद मलकीत सिंह के संस्कार के मौके पर।
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‘कित्थे गया मेरा मीतो, कोई तां लिया दिओ’
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बीमार रहने वाली मां को कभी छोड़ कर रिश्तेदारी या कहीं दूर नहीं जाने वाला मलकीत सदा के लिए संसार से विदा हो गया।
‘कित्थे गया मेरा मीतो, कोई तां लिया दिओ’
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सेक्टर-25 के श्मशान घाट में मलकीत की मां का रो-रो कर बुरा हाल था। हर किसी की आंख नम थी। पार्षद शीला देवी व अन्य महिलाओं ने उन्हें कई बार हौसला दिया।
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‘कित्थे गया मेरा मीतो, कोई तां लिया दिओ’
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मलकीत के छोटे भाई हरदीप सिंह का भी रो रो कर बुरा हाल है। परिवार में मलकीत सिंह की पत्नी सतनाम कौर, बेटे हर्षप्रीत सिंह और आठ साल की बेटी अमनजोत कौर भी इस मौत से सदमे में हैं।
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‘कित्थे गया मेरा मीतो, कोई तां लिया दिओ’
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गांव और परिवार के सदस्य सभी को संभालने पर लगे हैं, पर मलकीत की कमी तो कोई भी न पूरी कर पाएगा।
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‘कित्थे गया मेरा मीतो, कोई तां लिया दिओ’
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सेक्टर-37 में मलकीत सिंह का टेंट का कारोबार है। इसके ऑफिस में दोनों भाइयों मलकीत और हरदीप की कुर्सी साथ में लगती है। अब एक कुर्सी खाली रहेगी। इस खाली कुर्सी को हरदीप कैसे देखेगा।