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देखिए अनोखा गांवः जहां एक भी अनपढ़ नहीं, बच्चे-बूढ़े सब शिक्षित

Mon, 07 Nov 2016 09:04 AM IST
डीडी गोयल/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा)
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अनोखा गांव, जहां एक भी अनपढ़ नहीं बच्चे-बूढ़े सब पढ़ाकू
देखिए देश का एक ऐसा अनोखा गांव, जहां का एक भी बच्चा अनपढ़ नहीं है। बच्चों और महिलाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी पढ़ाकू हैं।
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अनोखा गांव, जहां एक भी अनपढ़ नहीं बच्चे-बूढ़े सब पढ़ाकू
ये गांव है हरियाणा के सिरसा जिले का सावंतखेड़ा। इसमें कोई अंगूठा टेक नहीं रहा है। करीब चार साल की कड़ी मेहनत के बाद यह मुकाम मिला है। अब गांव के बुजुर्ग भी हस्ताक्षर कर सकते हैं, यहां तक की अखबार पढ़ सकते हैं। यह प्रदेश का दूसरा ऐसा गांव है, यहां कोई निरक्षर नहीं रहा है। इससे पहले साल  2014 में खंड डबवाली के गांव चकजालू ने यह सफलता अर्जित की थी।
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अनोखा गांव, जहां एक भी अनपढ़ नहीं बच्चे-बूढ़े सब पढ़ाकू
साक्षर भारत मिशन के तहत वर्ष 2012 में निरक्षरों पर एक सर्वे हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग नं. 9 पर स्थित गांव सांवतखेड़ा में निरक्षरों की संख्या करीब 285 थी। निरक्षरों में 108 पुरुष तथा 177 महिलाएं शामिल थीं। प्रेरकों की नियुक्ति के बाद अगस्त 2013 में पहली दफा परीक्षा हुई। जिसमें 8 पुरुष तथा 35 महिलाएं पास हुई।

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मोहाली का अनोखा गांव, जहां अगले दिन मनाई जाती है दीवाली
मार्च 2014 में हुई परीक्षा में कुल 132 निरक्षरों ने परीक्षा पास करके खुद को साक्षर साबित किया। इसमें 44 पुरुष तथा 88 महिलाएं शामिल थीं। करीब एक साल बाद मार्च 2015 में साक्षर साबित करने के लिए निरक्षरों ने इम्तिहान दिया। कुल 98 निरक्षरों ने परीक्षा पास की। इस बार भी पुरुष के मुकाबले महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। साक्षर साबित करने वालों में 45 पुरुष तथा 53 महिलाएं शामिल थीं।
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होशियारपुर के गांव
अगस्त 2015 में लगातार दूसरी परीक्षा हुई। जिसमें पांच पुरुष तथा छह महिलाओं ने परीक्षा पास की। वर्ष 2012 के सर्वे में आए सभी निरक्षर परीक्षा में पास हो गए। लेकिन प्रेरकों ने अपने स्तर पर सर्वे करके 35 ऐसे निरक्षर ढूंढ निकाले, जो बाहर से आकर गांव में बस गए थे। मार्च 2016 में निरक्षरों को ट्रेनिंग देकर परीक्षा में बैठाया गया। जिसमें 16 पुरुष के साथ-साथ 19 महिलाएं भी शामिल थीं। सभी ने परीक्षा पास की।
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होशियारपुर के गांव
इस प्रकार करीब चार वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद उपरोक्त सभी 319 निरक्षरों को साक्षर करने में प्रेरकों ने अहम रोल अदा किया। इसके साथ ही सांवतखेड़ा पूर्ण साक्षर गांव बन गया। इसी दौरान ग्राम पंचायत ने आवेदन करके पूर्ण साक्षर गांव का दर्जा मांगा। साक्षर भारत मिशन की टीम ने अपने स्तर पर गांव में सर्वे करके गांव को पूर्ण साक्षर मान लिया है। लेकिन जिला प्रशासन से सर्टिफिकेट मिलना अभी शेष है। अगर नव: साक्षर 319 लोग जिला प्रशासन की कसौटी पर खरा उतरते हैं, जिला प्रशासन गांव को सम्मानित कर सकता है।

 
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इंडो पाक बॉर्डर पर हाईअलर्ट के चलते लोगों ने छोड़ा गांव - फोटो : अमर उजाला
सांवतखेड़ा से पहले गांव चकजालू प्रदेश का ऐसा गांव बना था, जिसमें कोई भी अंगूठा टेक नहीं है। वर्ष 2012 में निरक्षरों की संख्या 111 थी। अगस्त 2013 में 21 तथा मार्च 2014 में सभी 90 लोग साक्षर हो गए थे। उपमंडलाधीश डबवाली के नेतृत्व में बनी कमेटी ने जुलाई 2014 में चकजालू को पूर्ण साक्षर गांव का दर्जा दिया था। तत्कालीन उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा ने गांव को पुरस्कार देते हुए पांच लाख रुपये के विकास कार्य मंजूर किए थे।

 
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इंडो पाक बॉर्डर पर हाईअलर्ट के चलते लोगों ने छोड़ा गांव - फोटो : अमर उजाला
सांवतखेड़ा पूर्ण साक्षर हो चुका है। जिला प्रशासन जल्द एक कमेटी बनाकर इसकी जांच करवाएगा। इसके बाद गांव को पूर्ण साक्षर का दर्जा दिया जाएगा। गांव को सम्मानित किया जाएगा।
-सुरेंद्र आर्य, जिला समन्वयक, साक्षर भारत मिशन, सिरसा
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