इस तस्वीर को गौर से देखिए। पलंग पर अचेत-सी लेटी इस महिला का नाम बलजिंदर कौर है। साथ है 11 महीने का बेटा अर्श। यह बच्चा हंसता है, मुस्कराता है। शायद मां को बुलाने की कोशिश करता है, लेकिन मां नहीं बोलती।
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देखिए, बेटे को जन्म देते ही 'तस्वीर' सी हो गई मां
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ये मार्मिक सच्चाई है पंचकूला के इस परिवार की। न हंसती है, न ही रोती है। सतपाल ने बताया था कि पंचकूला सेक्टर-17 के एक निजी अस्पताल में डॉक्टर की लापरवाही से उसकी पत्नी मां बनते ही कोमा में चली गई। 11 महीने से बेड पर है।
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इसी खामोशी के कारण यह घर एलबम-सा हो गया है, जिसमें अर्श के जन्म से पहले और बाद की खट्टी-मीठी यादें हैं। उम्र कम है, इसलिए अर्श नहीं जानता कि मां कोमा में है, लेकिन मां की चुप्पी देख रोने लगता है तो पिता सतपाल की आंखें भर जाती हैं। उन्हें लगता है कि जैसे अर्श पूछ रहा है कि पापा मम्मा बोलतीं क्यों नहीं...खिलौनों की तरह चुप क्यों रहती हैं...मेरे साथ खेलती क्यों नहीं...?
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सतपाल ने बताया कि पीजीआई के डॉक्टरों ने तो यहां तक कह दिया है कि अब तो भगवान ही बचा सकता है। कोर्ट-कचहरी से लेकर मंत्रियों तक को डॉक्टर की शिकायत कर इंसाफ मांगने वाले सतपाल का दर्द उसके घर का चप्पा-चप्पा बयां करता है। सतपाल के पिता को लकवा है, बूढ़ी मां पति और बहू की हालत देख डिप्रेशन में है। सभी की देखभाल के लिए सतपाल घर पर है तो बिजनेस भी छूट गया है।