एवीएस स्पिनिंग मिल में आग लगने से सात श्रमिकों के जिंदा जलने व तीन के गंभीर रूप से झुलसने के बाद पानीपत से लेकर चंडीगढ़ तक हिल गया। शासन ने श्रम विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर दी है। टीम स्पिनिंग मिल का मौका मुआयना कर हादसे की बारीकियों को जांचने के साथ अन्य कमियों का पता लगाएगी। वहीं प्रशासन व पुलिस शनिवार सुबह एक बार फिर सर्च अभियान चलाएंगे।
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फैक्ट्री में हादसा
- फोटो : अमर उजाला
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एडिशनल चीफ सेक्रेटरी विजयवर्धन की अगुवाई में एक टीम गठित की है। इसमें श्रम विभाग के सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के अधिकारी व एक्सपर्ट को शामिल किया गया है। टीम हादसे की जानकारी लगते ही चंडीगढ़ से पानीपत के लिए रवाना हो गई है और देर रात करीब 12 बजे तक पानीपत पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
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प्रशासन इस बार सख्ती करने की तैयारी में-
जिल प्रशासन इस बार हादसे में सख्ती करने की तैयारी में है। डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने भी माना कि एवीएस स्पिनिंग मिल में सुरक्षा के कोई मापदंड नहीं अपनाए गए थे। इसके चलते हादसा समय पर काबू पाने की बजाय बढ़ता चला गया। एसीएस की अगुवाई में गठित टीम की रिपोर्ट के बाद श्रम विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में कई अधिकारियों की धड़कन तेज हो गई हैं।
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यूनियन ने मृतकों के परिजनों को 10-10 व झुलसे श्रमिकों को पांच-पांच लाख की मांग की-
इंडस्ट्रीयल वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू के महासचिव सुनील दत्त ने एवीएस स्पिनिंग मिल में आग लगने से मृतक श्रमिकों के परिजनों को दस-दस लाख व झुलसे श्रमिकों को पांच-पांच लाख का मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्पिनिंग मिल में श्रमिकों की सुरक्षा की तरफ किसी तरह का ध्यान नहीं दिया गया था जिसके चलते हादसा गंभीर हो गया। उन्होंने मिल मालिकों पर भी उचित कार्रवाई करने की मांग की।
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हादसों में खो चुके हैं दर्जनों अपनी जान-
शहर स्थित फैक्ट्रियों में आग लगने व दूसरे कारणों के चलते दर्जनों श्रमिक अपनी जान से हाथ धो चुके हैं। दो माह पहले देवपुरी रोड स्थित दरी बनाने वाली एक फैक्ट्री में आग लगने से मां-बेटा जिंदा जल गए थे। उग्रा खेड़ी के नजदीक एक कॉलोनी निवासी महिला उस रात अपने परिवार के साथ फैक्ट्री में काम पर आई हुई थी।
महिला का सात साल का लड़का उसके नजदीक ही सो रहा था। वहीं महराना स्थित एक फैक्ट्री में पिछले माह आग लगने के बाद एक श्रमिक जिंदा जल गया था। 23 नवंबर को गांजबड़ स्थित शिव शक्ति फैक्ट्री के जनरेटर की चपेट में आने से तहसील कैंप निवासी वेल्डर अमरकांत की गर्दन धड़ से अलग हो गई थी।