पंजाब विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक आम आदमी पार्टी लगातार गलतियां कर रही है। जिसका खामियाजा वो भुगत भी रहे हैं, देखिए
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- फोटो : File Photo
पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद अरविंद केजरीवाल ने जहां पंजाब का रुख नहीं किया, वहीं भगवंत मान को सूबा कनवीनर बनाकर पार्टी के दूसरे नेताओं को बोलने का मौका दे दिया है। पार्टी के इस फैसले को विदेश बैठे कंवर संधू ने चुनाव के बाद की गलती ठहराया है।
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- फोटो : फाइल फोटो
चुनाव से पहले की ही गलती है कि लीडरशिप में टकराव के चलते पार्टी पंजाब में मुख्यमंत्री का चेहरा प्रोजेक्ट नहीं कर सकी। बिना किसी जमीनी आधार के उठकर आए नेताओं ने मुख्यमंत्री बनने का सपना देख लिया। उस समय तक तो पार्टी ने अपने नेताओं को साध लिया, लेकिन अब तालमेल बिठाना मुश्किल होगा।
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भगवंत मान को सूबा कनवीनर बनाए जाने से नाराज गुरप्रीत घुग्गी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही स्वयं तो मैदान से बाहर आ गए, लेकिन एचएस फूलका और सुखपाल खैरा का नाम लेकर एक नए मुद्दे को जीवंत कर दिया है। आने वाले समय में पार्टी में यह मुद्दा भी उछलेगा।
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- फोटो : फाइल फोटो
चुनाव से पहले की गलतियां
-पहली गलती यूथ मेनिफेस्टो पर झाडू का निशान, जिसके बाद आशीष खेतान को हटा दिया।
-सुच्चा सिंह छोटेपुर का पार्टी छोड़कर जाना रोकने की कोशिश नहीं।
-पूर्व आतंकी के घर केजरीवाल का ठहरना कट्टर पंथियों से नजदीकी ने हिंदू वोटर नाराज किया, जिसका फायदा कांग्रेस को मिला।
-बंत सिंह की बेटी के रेप के आरोपियों को पार्टी में शामिल करना।
-मनीष सिसोदिया का बयान कि केजरीवाल को ही सीएम समझें, चुनाव से ठीक पहले इस बयान से खलबली मच गई।
बाद की गलतियां
-हार के बाद पार्टी का एक भी राष्ट्रीय नेता पंजाब की सुध लेने नहीं आया।
-पार्टी नेता लगातार एक दूसरे के खिलाफ बोलते रहे कोई बीच बचाव नहीं हुआ।
-फूलका ने यात्रा निकाली तो घुग्गी ने कहा, यह पार्टी की यात्रा नहीं।
-घुग्गी ने नेताओं की ड्यूटियां लगाईं तो कोई फील्ड में नहीं गया।