आधार कार्ड को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। कोई नहीं बताएगा इस बारे में, यहां क्लिक करके जानिए और संभल कर रहिए।
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आधार कार्ड
पंजाब के मोगा में थाना सिटी पुलिस ने नगर निगम मेयर की शिकायत पर निगम लाइब्रेरी में स्थापित सुविधा केंद्र के ऑपरेटर, सह ऑपरेटर ओर एक अन्य खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। उन पर आरोप है कि वे मेयर की जाली लेटरपैड तैयार करके एनआरआई और अन्य के पास से रिश्वत लेकर आधार कार्ड जारी करा रहे थे।
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aadhar card
थाना सिटी प्रमुख इंस्पेक्टर गुरप्रीत सिंह सरां ने बताया कि उनको नगर निगम मेयर अक्षित जैन ने लिखित शिकायत दी थी कि निगम की लाइब्रेरी में स्थापित सुविधा केंद्र पर जिन लोगों के पास अपना कोई पक्का रिहाइशी या जन्म तारीख आदि सबूत नहीं होता, उनसे मोटी रकम लेकर मेयर का जाली लेटरपैड और मोहर तैयार करके तस्दीकनामा बनाया जा रहा है। इसके जरिए आधार कार्ड जारी किया जा रहा है।
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आधार कार्ड
उनकी शिकायत पर निगम की लाइब्रेरी में स्थापित सुविधा केंद्र के ऑपरेटर दविंदर सिंह सह आपरेटर प्रदीप कौर और सेवा केंद्र के पूर्व चौकीदार गुरप्रीत सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक मेयर के पास किसी एनआरआई ने यह शिकायत की थी कि उसके पास कोई भारत में निवास एवं रिहाइश का कोई पक्का सबूत न होने के कारण आधार कार्ड नहीं बन रहा है।
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आधार बिल
- फोटो : UIADI
इसके बाद एनआरआई ने सेवा केंद्र के पूर्व सेवादार गुरप्रीत सिंह से संपर्क किया। एनआरआई का कहना था कि गुरप्रीत ने 5 हजार रुपये लिए है और उसे आधार कार्ड बनवाकर देने का आश्वासन दिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि शिकायत मिलने पर मेयर के पास मौजूद काउंसिलरों ने सेवा केंद्र के पूर्व सेवादार गुरप्रीत सिंह को काबू कर लिया और उसके पास से एनआरआई से हासिल राशि भी बरामद हो गई। इसके बाद सिटी पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। आरोपी गुरप्रीत सिंह ने नगर निगम के एक ठेका कर्मी के जरिये आधार कार्ड बनवाकर देने की बात मानी।
रिहाइश का सबूत न होने से परेशान हैं एनआरआई
गौरतलब है कि आधार कार्ड को बैंक खातों से जोड़ना जरूरी किया गया है। इसके अलावा घरेलू गैस सब्सिडी भी आधार से जुड़े बैंक खाते में ही जमा होती है। एनआरआईज के बैंक खाते देश में भी हैं और वे आधारकार्ड न होने के कारण वह बेहद परेशान हैं। उन एनआरआईज को आधार बनवाने के लिए अधिक परेशानी आ रही है जिनके पास भारतीय होने का कोई सबूत नहीं है। ऐसे लोगों को विधायक या संासद से लेटरपैड पर मूल रूप में भारतीय होने का तस्दीकनामा करवाना पड़ता है।