एक आम इंसान से 'दयावान' यूं ही नहीं बन गए थे विनोद खन्ना। इसके पीछे एक किसान का अहम योगदान रहा, जिसकी वजह से उन्हें पहला ब्रेक मिला।
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पठानकोट को लाइफ लाइन दे गए सांसद खन्ना
उसके बाद शुरू हुआ वो सिलसिला, जिसने हैंडसम हंक विनोद खन्ना को बॉलीवुड का सुपरस्टार बना दिया। बता दें कि हरियाणा के एक किसान सोमदत्त को जब सिल्वर स्क्रीन पर बतौर हीरो उतारने की कवायद शुरू हुई तो इसी फिल्म की बदौलत विनोद खन्ना को पहला ब्रेक मिला। ये किसान कोई और नहीं बल्कि अभिनेता संजय दत्त के चाचा सोमदत्त थे।
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vinod khanna
सोमदत्त के साथ मूवी में काम करने का पहला ब्रेक तो मिला, लेकिन विनोद खन्ना को खलनायक का क्रूर किरदार ही नसीब हुआ था। किस्मत देखिए, सोम दत्त तो इस फिल्म में नहीं चले, लेकिन विनोद खन्ना की निकल पड़ी। सोमदत्त चंद फिल्मों के बाद वापस आकर खेती करने लगे, मगर विनोद खन्ना आगे बढ़ते चले गए। फिर उन्हें बिग बी अमिताभ बच्चन के बराबर सफलता मिलने लगी थीं।
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विनोद खन्ना
- फोटो : SELF
उल्लेखनीय है कि साढ़े के दशक के अंतिम साल में रिलीज हुई मन का मीत यमुनानगर के गांव मंढौली वासी किसान सोम दत्त को लांच करने के लिए उनके बड़े भाई सुनील दत्त ने बनाई थी। तब ना यह फिल्म चली और ना ही इस फिल्म के हीरो सोम दत्त सफल हुए, मगर इसके बाद फिल्म से एंट्री करने वाले विनोद खन्ना का सिक्का ऐेसा चला कि करीब 48 वर्ष के कैरियर में उन्होंने खलनायक से नायक का मुकाम हासिल किया।
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विनोद खन्ना
वहीं अध्यात्म से लेकर राजनीति के मायनों को भी समझा। वीरवार को जब टीवी, न्यूज पोर्टल और सोशल मीडिया पर विनोद खन्ना के निधन की खबर उनके चाहने वालों को लगा तो ये उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। गीता जयंती के दौरान सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी जब कुरुक्षेत्र में द्रॉपदी डांस ड्रामा की प्रस्तुति देने पहुंची तो इस दौरान अमर उजाला से विशेष बातचीत की थी।
इस बातचीत में हेमा मालिनी ने बताया था कि उनकी अगली फिल्म विनोद खन्ना के साथ होगी। इस दौरान हेमा मालिनी ने भाजपा की संस्थापक सदस्या और सिंधिया घराने की राजमाता स्व. विजयाराजे सिंधिया की बायोग्राफी पर रही फिल्म एक थी रानी ऐसी भी... का जिक्र किया था। बता दें कि यह फिल्म छह दिन पहले 21 अप्रैल को रिलीज हुई है, जोकि फिल्म विनोद खन्ना के जीवित रहते अंतिम रिलीज फिल्म साबित हुई।