भिवानी के एक किसान की बेटी ने दौड़ते-दौड़ते रिकॉर्ड बना डाला और अब नजरें ओलंपिक में मेडल जीतने पर होंगी। देखिए, प्रोफाइल।
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हरियाणा की धावक निर्मला श्यौराण
- फोटो : फाइल फोटो
भिवानी के चहड खुर्द गांव की निर्मला श्योराण ने ओलंपिक का सफर ऐसे हालात में तय किया है, जिसके बारे में कोई सपने में नहीं सोच सकता। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली निर्मला पर खेल के साथ पढ़ने का दबाव रहता था। वह पढ़ते-पढ़ते ही ओलंपिक तक पहुंच गई और उसने इस साल बीए भी पास कर लिया।
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हरियाणा की धावक निर्मला श्यौराण
- फोटो : फाइल फोटो
बहल के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में दमकौरा के कोच बिजेंद्र सिंह खिलाड़ियों को प्रैक्टिस कराते थे। यहां वर्ष 2009 में निर्मला भी कक्षा नौ में पढ़ती थी। निर्मला के पिता सुरेश की कोच बिजेंद्र से दोस्ती थी। इसी आधार पर सुरेश ने बिजेंद्र से कहा कि वह उनकी बेटी को भी प्रैक्टिस कराए। इसके बाद निर्मला पहली बार खेलने के लिए उतरी और एथलीट बनने की राह पकड़ी। उसके बाद निर्मला ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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स्प्रिंटर निर्मला श्योराण
- फोटो : फाइल फोटो
निर्मला लगातार प्रैक्टिस करते हुए आगे बढ़ती रही और उसने 2012 में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता तो 2013 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेलने गई। 2013 में आल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में वह बेस्ट एथलीट भी बनी। अब 2016 में तेलंगाना में इंटर स्टेट एथलीट की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड जीतकर ओलंपिक का टिकट कटाया।
निर्मला ने रिकार्ड 51.48 सेकेंड में दौड़ पूरी करके ओलंपिक का टिकट कटाया है, जबकि पहले एमआर पोम्मा के नाम 51.71 सेकेंड का रिकार्ड था। ऐसा नहीं है कि वह केवल खेल में आगे रहती है, बल्कि निर्मला ने खेल के साथ इसी साल एमडीयू से बीए पास किया है। उसके यहां कोई खिलाड़ी नहीं था, इसके बावजूद निर्मला ने खेल को चुनकर उपलब्धियां हासिल की।