आज हम हरियाणा के उन 5 बेटियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होने देश-विदेश में भारत का डंका बजाया। देखिए आपको भी हरियाणवी होने पर गर्व होगा..
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- फोटो : फाइल फोटो
गीता फोगाट एक भारतीय महिला फ्रीस्टाइल पहलवान है जिन्होंने पहली बार भारत के लिए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। गीता ने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। साथ ही गीता पहली भारतीय महिला पहलवान है जिन्होंने ओलम्पिक में क्वालीफाई किया। 23 दिसम्बर 2016 को प्रदर्शित हुई हिन्दी भाषी दंगल फ़िल्म इन्हीं पर आधारित है, जिसमें इनका किरदार फ़ातिमा सना शेख ने निभाया है जबकि आमिर ख़ान ने इनके पिता और कोच महावीर सिंह फोगाट का किरदार निभाया।
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साक्षी मलिक
- फोटो : PTI
साक्षी मलिक भारतीय महिला पहलवान हैं। इनका जन्म हरियाणा के रोहतक में हुआ। साक्षी ने ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में हुए 2016 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में कांस्य पदक जीता है। भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाली वे पहली महिला पहलवान हैं। इससे पहले साक्षी ने ग्लासगो में आयोजित 2014 के राष्ट्रमण्डल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीता था। 2014 के विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में भी इन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
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Manushi Chillar
हरियाणा की मानुषी छिल्लर ने मिस इंडिया 2017 का खिताब जीता। रविवार 25 जून को मुंबई के यशराज स्टूडियो में आयोजित समारोह में मिस हरियाणा मानुषी को पिछली बार की विजेता रहीं प्रियदर्शिनी चटर्जी ने ताज पहनाया। खानपुर मेडिकल कॉलेज की स्टूडेंट मानुषी एमबीबीएस सेकंड ईयर में है।
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Manushi Chillar
मूल रूप से झज्जर जिले के बहादुरगढ़ से सटे गांव कानौंदा निवासी मानुषी के पिता मित्रवासु छिल्लर और मां नीलम छिल्लर डॉक्टर हैं। फिलहाल फैमिली दिल्ली में रहती है, वहीं मानुषी का ननिहाल गांव सोनीपत जिले के गांव जागसी में है।
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कविता दलाल, रेसलर
मशहूर पहलवान कविता दलाल ने डब्ल्यूडब्ल्यूई में सिलेक्ट होकर इतिहास रच दिया है। कविता वहां तक पहुंचने वाली देश की पहली महिला पहलवान बन चुकी हैं। अब वे डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में 31 पहलवानों से भिड़ेंगी। हरियाणा की रहने वाली कविता पेशेवर रेसलर बनने के लिए WWE चैंपियन रहे द ग्रेट खली के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ले रही हैं। उनकी ट्रेनिंग खली की पंजाब स्थित ट्रेनिंग अकादमी में हो रही है।
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एथलीट दीपा मलिक
दीपा मलिक शॉटपुट एवं जेवलिन थ्रो के साथ-साथ तैराकी एवं मोटर रेसलिंग से जुड़ी एक दिव्यांग भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने 2016 पैरालंपिक में शॉटपुट में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। 30 की उम्र में तीन ट्यूमर सर्जरीज और शरीर का निचला हिस्सा सुन्न हो जाने के बावजूद उन्होने न केवल शॉटपुट एवं ज्वलीन थ्रो में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीते हैं, बल्कि तैराकी एवं मोटर रेसलिंग में भी कई स्पर्धाओं में हिस्सा लिया है। उन्होने भारत की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 33 स्वर्ण तथा 4 रजत पदक प्राप्त किये हैं।
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दीपा मलिक
- फोटो : अमर उजाला
दीपा मलिक भारत की एक ऐसी पहली महिला है जिसे हिमालय कार रैली में आमंत्रित किया गया। वर्ष 2008 तथा 2009 में उन्होने यमुना नदी में तैराकी तथा स्पेशल बाइक सवारी में भाग लेकर दो बार लिम्का बूक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज कराया। यही नहीं, सन् 2007 में उन्होने ताइवान तथा 2008 में बर्लिन में जवेलिन थ्रो तथा तैराकी में भाग लेकर रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त किया। कोमनवेल्थ गेम्स की टीम में भी वे चयनित की गई।
पैरालंपिक खेलों में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के कारण उन्हे भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया। रियो पैरालिंपिक खेल- 2016 में दीपा मलिक ने शॉट-पुट में रजत पदक जीता, दीपा ने 4.61 मीटर तक गोला फ़ेंका और दूसरे स्थान पर रहीं. पैरालिंपिक खेलों में मेडल जीतने वाली दीपा पहली भारतीय महिला बन गई हैं।