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1971 वार स्पेशल: पाक को धूल चटाने वाले वीर शहीद गुमनाम

Fri, 18 Dec 2015 01:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा)
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पाकिस्तान के साथ 1971 में हुए युद्ध में शहादत पाने वाले वीर जवान आज के युवाओं के लिए गुमनाम हो चुके हैं। युवा पीढ़ी इन शहीदों से अनजान है। देखिए, पूरा मामला।
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1971 वार स्पेशल: पाक को धूल चटाने वाले वीर शहीद गुमनाम

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पाकिस्तान के साथ हुए इस युद्ध में कोतरखाना गांव के हवलदार करतार सिंह, महलावाली के सिपाही जीत सिंह, साढ़ौरा के महमदपुर गांव के सिपाही दयालचंद व खारवन के हवलदार जगीर सिंह वीरगति को प्राप्त हुए थे।
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उस समय इन शहीदों को उनके गांव का बच्चा-बच्चा जानता था। लेकिन आज की युवा पीढ़ी इन शहीदों से अनजान है। शहीदों के गांवों में आज तक उनके नाम से कोई स्मारक नहीं बनाया गया है। इतना ही नहीं जिला प्रशासन भी इन शहीदों को भुला चुका है।

1971 वार स्पेशल: पाक को धूल चटाने वाले वीर शहीद गुमनाम

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हरियाणा एंटी करप्शन सोसाइटी के प्रदेशाध्यक्ष वरियाम सिंह का कहना है कि सरकारों को शहीदों का सम्मान करना चाहिए। इन शहीदों की वजह से आज हम आजादी की सांस ले रहे हैं। 1971 में हमारे वीर सैनिकों ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी।
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इस लड़ाई में हमारे काफी सैनिक शहीद हुए। देश वासी आज इन शहीदों को भूल चुके हैं। प्रदेश सरकार को इन शहीदों के नाम के स्मारक बनाने चाहिए ताकि युवा पीढ़ी इनके बारे में जान सके और इनकी तरह देश के लिए मर-मिटने के लिए तैयार रहे।
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महमदपुर गांव के पूर्व सरपंच चूहड़ सिंह ने बताया कि सिपाही दयालचंद बहुत सीधे-साधे और मिलनसार थे। सेना में नौकरी के दौरान जब वे छुट्टी पर गांव आते थे तो युवाओं में खूब जोश भरते थे। उनकी शहादत के बाद कई दशकों तक गांव के लोग उन्हें याद करते रहे।
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आज की युवा पीढ़ी उन्हें भूल चुकी है, क्योंकि गांव में उनके नाम का कोई स्मारक या यादगार नहीं है। महलावाली गांव के पूर्व सरपंच सरदारा सिंह को भी इस बात का मलाल है कि गांव में शहीद जीत सिंह के नाम से कोई स्मारक नहीं है।
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सरदारा सिंह ने बताया कि गांव के लोग जीत सिंह को जानते हैं, लेकिन बच्चे उनके बारे में कुछ नहीं जानते। उनका मानना है कि गांव में शहीद का स्मारक बनना चाहिए और प्रशासन को हर साल उनकी याद में कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए।
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