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1857 की क्रांति में मारे गए 282 सैनिकों में महिलाएं भी शामिल थीं, कुएं में मिले थे शवों के अवशेष

Thu, 14 Feb 2019 12:50 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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अजनाला का कुंआ
1857 की क्रांति में मारे गए 282 सैनिकों में महिलाएं भी शामिल थीं और अब उनकी उम्र का पता भी लगा लिया गया है। इन सभी सैनिकों के शवों के अवशेष एक कुएं से मिले थे।
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अजनाला का कुंआ
आजादी की पहली क्रांति में मारे गए 282 सैनिकों की उम्र 19 से 52 वर्ष के बीच थी। हालांकि इनकी संख्या क्रांति के दौरान मारे गए सैनिकों की कुल संख्या की तीन फीसदी ही थी। इसका खुलासा पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के प्रोफेसर जेएस सहरावत की जांच में हुआ है।
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अजनाला का कुंआ
प्रो. सहरावत ने कहा कि उन्होंने तीन मेथड से अब तक अपनी जांच की है, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि 1857 की क्रांति में शहीद होने वालों में महिलाएं भी शामिल थीं। हालांकि यह बात पुख्ता तौर पर अंतिम जांच में ही प्रमाणित होगी। ऐसे में इन तीन फीसदी नमूनों की एक जांच और होगी। यह जांच डीएनए के अलावा व्हूल जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिए की जाएगी। इसके अलावा 97 फीसदी मारे गए सैनिक पुरुष पाए गए हैं।

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अजनाला का कुंआ
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मारे गए सैनिकों की आयु 19 से 52 साल के मध्य थी। फोरेंसिक तरीकों से हुई जांच के तहत प्रो. सहरावत को बड़ी कामयाबी हासिल हुई तो इसकी कहानी सुनने केलिए उन्हें अमेरिका से बुलावा आया है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ फोरेंसिक साइंसेज की ओर से 18 से 23 फरवरी के बीच सम्मेलन कराया जा रहा है, जिसमें दुनिया के टॉप 5000 वैज्ञानिक भाग लेंगे। प्रो. सहरावत भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे। उनकी यात्रा का सारा खर्च भारत सरकार वहन कर रही है।
 
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अजनाला का कुंआ
गौरतलब है कि कि वर्ष 2014 में अमृतसर के पास अजनाला के कुएं में मिले 282 सैनिकों के मानव कंकाल व नौ हजार दांतों की जांच प्रो. सहरावत ने तीन तरीकों से की। इसमें एक्स-रे रेडियोग्राफी व पल्प टू एरिया रेस्यू, एलिमेंट एनालिसिस और ऑडेंटोमेट्रिक्स तरीका अपनाया। इसी के जरिए सैनिकों की आयु व जेंडर का पता लगा। प्रो. सहरावत ने इन सैनिकों के नाम इंग्लैंड की सरकार से मांगे हैं, ताकि उनके डीएनए की जांच कर यह कंकाल उनके परिजनों को सौंपे जा सकें।
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महिला का कंकाल मिला - फोटो : अमर उजाला
मालूम हो कि टेंथ ऑफ मई अनटिल फाल ऑफ डेथ पुस्तक के जरिए अमृतसर के अजनाला में कुएं की खोदाई हुई थी। उसी में यह कंकाल मिले हैं। ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी कूपर ने जो भी बात अपनी पुस्तक में लिखी वह सच साबित हुई। प्रो. सहरावत इसे पूरे मामले से जुड़े रिसर्च को दुनियाभर के वैज्ञानिकों के सामने मौखिक प्रस्तुति देकर बताएंगे।
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