102 पुल और चार मंजिला स्टोन आर्च पुल व मनमोहक घाटियों से होता हुआ जाने वाला कालका-शिमला हेरीटेज ट्रैक आज 112 साल का हो गया है। देखिए, अनकही बातें। रिपोर्ट: सौरव यादव/कालका
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कालका-शिमला हेरीटेज ट्रैक के 112 साल, अनकही बातें
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हिमाचल की सुंदर वादियों के लुभावने दृश्य देखने के लिए देश से ही नहीं विदेश से भी हर वर्ष भारी संख्या में सैलानी कालका रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं और हसीन वादियों का नजारा लेने के लिए टॉय ट्रेन में सफर करते हैं। यही कारण है कि आजकल ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनें फुल चल रही हैं।
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नवंबर 1903 में दो फिट छह इंच की इस नैरो गेज लाइन पर रेल यातायात शुरू हुआ था। आज विश्व धरोहर में शामिल इस कालका-शिमला रेलमार्ग को एक सौ 12 वर्ष पूरे हो गए हैं। कालका शिमला रेल ट्रैक समुद्र तल से 2075 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
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इस मार्ग की लंबाई लगभग 96 किलोमीटर है। यह रेल मार्ग 102 पुल और चार मंजिला स्टोन आर्च पुल व मनमोहक घाटियों से होता हुआ शिमला पहुंचा जाता है। इस मार्ग को 10 जुलाई 2008 को यूनास्को द्वारा विश्व धरोहर में शामिल किया गया था।
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वर्तमान में छह ट्रेनों का हो रहा संचालन: सुबह 4 बजे 52457 पैसेंजर, सुबह 5:10 बजे 72451 रेल कार, सुबह 5:30 बजे 52451 शिवाली डिलक्स, सुबह 6:00 बजे 52453 मेल, सुबह 8:30 बजे अप-मिक्स, दोपहर 12:10 बजे 52455 हिमालयन क्वीन।
सर्दी हो या गर्मी का मौसम टॉय ट्रेन हमेशा फुल रहती है। ट्रेन से शिमला जाने में सड़क मार्ग से अधिक समय लगने के बावजूद भी सैलानी रेल सफर को प्राथमिकता देते है। फिलहाल सर्दी शुरू हो गई है और पहाड़ो की हसीन वादियों का लुत्फ उठाने के लिए फिर से सैलानियों की भीड़ जुटने लगी है।