10 साल के बच्चे को क्या समझ होती है, कुछ नहीं। लेकिन एक बच्ची का रेप हुआ, वह गर्भवती हुई, मां बनी और बेटी को जन्म दिया तो क्या रही होगी उसकी मानसिकता? मामला चंडीगढ़ का है और केस में बच्ची के दोनों सगे मामाओं को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
वहीं पीड़िता की काउंसलिंग कर रहे चाइल्ड प्रोटेक्शन सोसाइटी के काउंसलर्स का कहना है कि बच्ची अक्सर पूछती थी कि आखिरकार उसे क्या हुआ है। हर बार बच्ची को ऑपरेशन का हवाला देकर उससे सच छुपाया गया। जब उसे अस्पताल में लाया गया, तब भी उसने यही सवाल पूछा। जब लेबर पेन शुरू हुई, तब भी वह पूछती रही कि इतना दर्द क्यों हो रहा है।
जब बेटी का जन्म हुआ, तब उसने पूछा कि ऑपरेशन क्यों किया गया। इन सभी सवालों का जवाब देना मुश्किल था, लेकिन फिर भी उसे जवाब दिए गए। ताकि उसे यह कभी न पता चले कि आखिरकार उसके साथ किस प्रकार की घटना घटी है। ताकि उसके मानसिक व शारीरिक विकास पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े।
अब हादसे से उबर चुकी है बच्ची
बच्ची के साथ दुराचार करने वाले
काउंसलर्स का कहना है कि बच्ची को तनावपूर्ण माहौल से बाहर निकालना बहुत मुश्किल रहा। लेकिन बच्ची आज पूरी तरह से रिकवर हो चुकी है। आज बच्ची अपनी पुरानी जिंदगी में लौट चुकी है। बच्ची के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसे मानसिक तौर पर परिपक्व बनाया जा चुका है।
बच्ची अपने अभिभावकों के साथ रह रही है, अब बच्ची बाकी बच्चों की तरह स्कूल भी जाने लगी है। बता दें कि घटना के बाद बच्ची की काउंसलिंग के लिए चाइल्ड प्रोटेक्शन सोसाइटी की ओर से तीन से चार एक्सपर्ट नियुक्त किए गए थे। बच्ची को पढ़ाई-लिखाई, खेलकूद व अन्य बच्चों के साथ रखकर काउंसलिंग की गई। ताकि बच्ची अपनी पुरानी जिंदगी में लौट सके।
ट्रायल शुरू होने के 68 दिन में आया फैसला
चंडीगढ़ जिला अदालत की एडीजे पूनम आर जोशी ने शुरू से ही केस का स्पीडी ट्रायल चलाया। 18 जुलाई को एफआईआर दर्ज होने के बाद से लेकर दो नवंबर तक पूरे मामले में कुल 107 दिन लगे। वहीं ट्रायल शुरू होने के बाद 68 दिन के अंदर ही सजा सुना दी गई, जो दुनिया का तीसरा सबसे स्पीडी ट्रायल रहा।
अदालत ने पहले आरोपी के खिलाफ 25 तो दूसरे आरोपी के खिलाफ मात्र 8 पेशियों में ही केस का ट्रायल पूरा कर दिया। देशभर में चुनिंदा ही ऐसे केस होंगे जिनमें 68वें दिन में ही दोषियों को सजा सुना दी गई हो।
ऐसे खुलासा हुआ दूसरे दोषी के नाम का
10 साल की बच्ची के रेपिस्ट मामा
इस साल जुलाई में 10 वर्षीय बच्ची के पेट में दर्द होने पर परिजन उसे अस्पताल ले गए। वहां जांच के बाद पता चला कि बच्ची 6 महीने की गर्भवती है। इसके बाद परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।
बच्ची ने बताया कि उसके मामा ने ही उससे कई बार गलत काम किया है। पुलिस ने बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और मां की शिकायत के आधार पर आरोपी मामा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं उसकी डीएनए नवजात से मेल न खाने पर पुलिस ने बच्ची की दोबारा काउंसिलिंग की।
इस पर बच्ची ने छोटे मामा का भी नाम लिया। पुलिस ने बच्ची के दोबारा मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराने के बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया था। उसके और नवजात के डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजे थे। बाद में आई रिपोर्ट में वह पॉजिटिव पाए गए थे।