देश में पहली बार जो खुद एक बच्ची है, वो 10 साल की लड़की मां बनने जा रही है और अब कभी भी डिलीवरी हो सकती है। जच्चा बच्चा की सुरक्षा के लिए उठाया गया बड़ा कदम।
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रोहतक में मामा ने बच्ची के साथ दुराचार किया
इस हफ्ते कभी भी हो सकती है डिलीवरी
चंडीगढ़ की दस साल की रेप पीड़िता बच्ची की प्रेग्नेंसी के करीब 36 हफ्ते पूरे होने में मात्र एक हफ्ता बचा है। संभावना जताई जा रही है कि अगले हफ्ते किसी भी दिन बच्ची की डिलीवरी हो सकती है। इस दौरान होने वाली जटिलताओं से निपटने के लिए छुट्टी पर केरल गईं सीनियर गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. पूनम गोयल को तुरंत हास्पिटल ज्वाइन करने को कहा गया है।
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child rape
टीम से एक डॉक्टर ने नाम वापिस लिया
सोमवार को वे हॉस्पिटल ज्वाइन कर लेंगी। उनकी देखरेख में ही बच्ची की डिलीवरी कराई जाएगी। इससे पहले गाइनेकोलाजिस्ट डॉ. अलका सहगल ने बच्ची के इलाज के लिए बनाए पैनल से अपना नाम वापस ले लिया था। डॉ. अलका की जगह डॉ. पूनम को शामिल किया गया है। जब कालेज प्रशासन ने बच्ची के मामले से अवगत कराया तो उन्होंने तुरंत वापस लौटने की हामी भरी।
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बच्ची से रेप
- फोटो : demo pics
शनिवार को बीपी बढ़ गया था
वहीं डॉक्टरों ने बताया कि शनिवार शाम को बच्ची का ब्लड प्रेशर बढ़ गया था। इससे डॉक्टर भी सकते में आ गए। हालांकि बाद में उसे कंट्रोल कर लिया गया। यदि बीपी कंट्रोल नहीं होता तो रविवार या सोमवार तक उसकी डिलीवरी करवानी जरूरी होती। डॉक्टरों का कहना है कि सोमवार से बच्ची का आखिरी हफ्ता शुरू हो जाएगा। इसलिए यह हफ्ता बच्ची के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
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बच्ची से रेप
ऑपरेशन की तैयारी शुरू
डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की डिलीवरी के लिए ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी गई है। नार्मल डिलीवरी होना मुश्किल है। इस बीच कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि मेडिकल कॉलेज में बच्ची के लिए जो टीम बनाई गई है, उनमें अनुभवों की कमी है। इस मुद्दे पर मेडिकल कॉलेज के एक सीनियर डाक्टर का कहना है कि ऐसे सवालों का कोई औचित्य नहीं है। मेडिकल कॉलेज के पास डॉक्टरों की सक्षम टीम है। ऐसे कई केस जो पीजीआई में ठीक नहीं हो पाए, उन्हें मेडिकल कॉलेज में ठीक किया गया है।
मामा ने किया था दुष्कर्म
दस वर्षीय बच्ची साथ उसके मामा ने दुष्कर्म किया था। जब वह सात महीने की प्रेग्नेंट हुई, तब जाकर पता चला कि उसके पेट में बेबी है। उसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई। पुलिस ने आरोपी मामा को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा। उसके बाद गर्भपात के लिए जिला अदालत में याचिका डाली गई। गर्भपात की याचिका खारिज कर दी गई। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई। पीजीआई की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने भी गर्भपात के लिए मना कर दिया।