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16 साल, 150 बार पेशी 46 गवाही के बाद राम रहीम दोषी, पढ़ें छत्रपति हत्याकांड की 10 अहम बातें

Sat, 12 Jan 2019 01:29 AM IST
ajay kumar अवधेश शुक्ला, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
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राम रहीम दोषी करार
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में परिवार को न्याय के लिए 16 साल इंतजार करना पड़ा। इस दौरान कोर्ट में करीब 150 बार पेशी हुई। सीबीआई ने केस की मजबूती के लिए 46 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने 21 लोगों की गवाही करवाई। इसके बाद कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए गुरमीत राम रहीम और तीन अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया।

 अब परिवार समेत पूरे देश की निगाहें 17 जनवरी को आने वाले फैसले पर टिक गई हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कोर्ट सजा पर फैसला पंचकूला कोर्ट से सुनाएगी या फिर सुनारिया जेल से, लेकिन मुख्यारोपी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 
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राम रहीम - फोटो : self
साध्वी यौन शोषण में पहले से ही 20 साल की सजा काट रहे राम रहीम को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। डिस्ट्रिक्ट अटार्नी पंकज गर्ग ने बताया कि इस केस में राम रहीम को कुल 150 बार कोर्ट में पेश होना पड़ा। वह 25 अगस्त 2017 के बाद 50 बार वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जबकि इससे पहले 100 बार प्रत्यक्ष रूप से पेश हो चुका था। वहीं, हत्याकांड के तीन अन्य आरोपी कृष्ण लाल, निर्मल सिंह और कुलदीप सिंह हर बार कोर्ट में उपस्थित हुए।    
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राम रहीम
एक बार में समझ नहीं पाया फैसला      
पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनारिया जेल से पेश हुआ गुरमीत राम रहीम को जब कोर्ट ने दोषी करार दिया तो वह समझ नहीं पाया। इसके बाद कोर्ट ने दोबारा कहा कि तुम्हें छत्रपति हत्याकांड में दोषी करार दिया जाता है। यह सुनकर उसने अपना सिर नीचे झुका लिया और चेहरे पर मायूसी छा गई। काफी देर तक वह स्तब्ध सा खड़ा रहा। राम रहीम के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह ने बताया कि दोषी करार देने के बाद उसकी स्थिति देखते ही बनती थी।       

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ram rahim
 24 अक्तूबर 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर हमला कर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था। 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रामचंद्र जिंदगी की लड़ाई हार गए, लेकिन उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हार नहीं मानी और सीबीआई जांच की मांग के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की और दिसंबर में इस केस की जांच शुरू हो गई थी। 
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Ram Rahim - फोटो : File Photo
हालांकि 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने यह जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। 16 साल इस केस की सुनवाई सीबीआई अदालत में चली। 11 जनवरी को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले में चार आरोपियों को दोषी करार दिया। यह वही अदालत है, जिसने गुरमीत राम रहीम को साध्वियों के यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। 
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कब क्या 

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ram rahim
1- 24 अक्तूबर 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर हमला कर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था और 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रामचंद्र छत्रपति जिंदगी की लड़ाई हार गए थे।  
   
2-  नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की और दिसंबर में इस केस की जांच शुरू हो गई थी।      

3- 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने यह जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी थी।  31 जुलाई 2007 को मामले की चार्जशीट सीबीआई की विशेष कोर्ट में फाइल हुई थी।

4- 12 दिसंबर 2008 को डेरामुखी राम रहीम सहित तीनों आरोपियों पर हत्या, साजिश रचने और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए गए थे।      

5-  16 साल तक चली सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से 46 गवाह जबकि बचाव पक्ष की ओर से मामले में 21 गवाह हुए पेश हुए थे।      

6- मामले की पूरी सुनवाई सुनवाई 150 बार हुई है। इसमें 25 अगस्त 2017 हिंसा के बाद डेरामुखी राम रहीम कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुआ।      

7- 2 जनवरी 2019 को गुरमीत राम रहीम को कोर्ट में समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए थे।      

8-  4 जनवरी 2019 को सीबीआई कोर्ट में राम रहीम की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग को लेकर याचिका दायर हुई थी।      

9-  8 जनवरी 2019 को सीबीआई कोर्ट ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राम रहीम को पेश होने के निर्देेश दिए।     
10- 11 जनवरी 2019 को सीबीआई की अदालत ने राम रहीम और तीन अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया।  17 जनवरी 2019 को चारों दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।
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