पूरे विश्व के बैंकिंग सिस्टम में एटीएम मशीन का काफी अहम योगदान है। आज से लगभग 50 साल पहले आई इस मशीन का आविष्कार होने का वाक्या काफी दिलचस्प है। भारत में एटीएम की शुरूआत 30 साल पहले हुई थी। जिस व्यक्ति ने इस मशीन को बनाया वो वैसे तो ब्रिटेन का नागरिक था, लेकिन उसका जन्म भारत में हुआ था। हम आज आपको बताने जा रहे है एटीएम की कहानी, भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में बैंकिंग करने के तरीके को बदल दिया है।
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बाथटब में नहाते वक्त आया था आइडिया
शिलांग में जन्मे ब्रिटिश नागरिक जॉन शेफर्ड बेरॉन को एटीएम मशीन का जनक माना जाता है। ब्रिटेन में बैंकनोट प्रिंट करने वाले स्पेशिलिस्ट के यहां नौकरी करने वाले बैंक में चेक डिपॉजिट करने से रह गए, जिसके बाद बाथटब में नहाते वक्त उनको ध्यान आया कि क्या नोट देने वाली ऐसी मशीन नहीं बन सकती है जैसे चॉकलेट मशीन है? अपने इस आइडिया को उन्होने बार्कलेस बैंक को बेच दिया, जिसके बाद 27 जून 1967 को लंदन के उपनगर इन्फील्ड में पहली एटीएम मशीन शुरू हुई।
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पहले होता था रेडियोएक्टिव इंक और वाउचर्स का इस्तेमाल
पहली एटीएम मशीन से पैसा निकालने के लिए कार्ड की जगह ऐसे वाउचर्स का इस्तेमाल होता था, जिन पर रेडियोएक्टिव इंक से लिखा जाता था। फिर फ्रॉड होने के खतरे को देखते हुए कार्ड का प्रयोग होने लगा, जिन पर मेगनेटिक स्ट्रिप लगा होता था।
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- फोटो : concept photo
बंबई में लगा था पहला एटीएम
भारत में पहला एटीएम सितंबर 1987 में बंबई में लगा था। सिटीबैंक और एचएसबीसी ने अपनी मुख्य ब्रांच में इन मशीन को इंस्टॉल किया था। इसके बाद 1999 तक भारत में 800 एटीएम लग गए थे। जून 2016 में पूरे देश में इनकी संख्या 2,15,039 थी।
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एटीएम
- फोटो : concept photo
बिहार में सबसे कम, गोवा में ज्यादा मशीन
आरबीआई के मुताबिक, आबादी के लिहाज से सबसे कम एटीएम बिहार में लगे हुए हैं और सबसे ज्यादा गोवा में हैं। भारत में एक एटीएम मशीन का इस्तेमाल 5855 लोग करते हैं। गोवा में 1929 और बिहार में 13,438 लोगों पर एक मशीन है। प्रति 1 लाख लोगों पर भारत में 19.7 एटीएम मशीन हैं
एटीएम कैपिटल के नाम से मशहूर है साउथ कोरिया
विश्व में सबसे ज्यादा एटीएम साउथ कोरिया में हैं जहां 1 लाख लोगों पर 278 एटीएम मशीन हैं। दूसरे नंबर पर मकाऊ है, जहां ये आंकड़ा 254 एटीएम का है।