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Electoral Bond: एसबीआई को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने की मिली मंजूरी, आसान शब्दों में समझें क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड

Sat, 01 Jan 2022 05:03 PM IST
ज्योति मेहरा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड (फ्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Istock
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई को केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2022 से इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने की मंजूरी दे दी है। इलेक्टोरल बॉन्ड को 1 जनवरी से 10 जनवरी तक जारी किए जाएगा। अपने बयान में सरकार ने कहा है कि एसबीआई को उसकी 29 अधिकृत ब्रांचों के जरिए इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। वहीं इलेक्टोरल बॉन्ड्स जारी होने की तारीख से 5 कैलेंडर दिनों तक ही मान्य रहेंगे। साथ ही किसी भी राजनीतिक दल को कोई भी भुगतान नहीं किया जाएगा। यदि इलेक्टोरल बॉन्ड को वैलिडिटी की अवधि के बाद जमा किया जाता है। सरकार ने कहा 2 जनवरी 2018 की तारीख वाले गैजेट नोटिफिकेशन के जरिए भारत सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड को नोटिफाई किया है। वहीं योजना के प्रावधानों के मुताबिक,  वह व्यक्ति इलेक्टोरल बॉन्ड्स को खरीद सकता है, जो भारतीय नागरिक है या भारत में स्थापित कंपनी है। इलेक्टोरल बॉन्ड को अकेले या संयुक्त तौर पर खरीद सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि इलेक्टोरल बॉन्ड आखिर है क्या?
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क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड (फ्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Istock
इलेक्टोरल बॉन्ड क्या होते हैं?
  • दरअसल, इलेक्टोरल बॉन्ड एक ऐसा बॉन्ड होता है, जिसके ऊपर एक करेंसी नोट की तरह उसका मूल्य लिखा होता है। इसका इस्तेमाल राजनीतिक दलों को व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों की तरफ से चंदा देने के लिए किया जा सकता है। 
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क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड (फ्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Istock
खास बातें
  • इलेक्टोरल बॉन्ड के 1000, 10,000 और 1 लाख रुपये के मल्टीपल में खरीदा जा सकता है।
  • देश भर में इलेक्टोरल बॉन्ड एसबीआई  के चुनिंदा ब्रांचेज में उपलब्ध होंगे।

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क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड (फ्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Istock
  • जिनके खाते का केवाईसी वेरिफाइड होगा केवल वही चुनावी बॉन्ड खरीद सकते हैं।
  • इन बॉन्ड को चंदा देने वाले लोग अपनी पसंद की पार्टी को बॉन्ड खरीदने के 15 दिन के अंदर ही देना होगा।
  • इस बॉन्ड को राजनीतिक पार्टी बैंक में वेरिफाइड अकाउंट के जरिए कैश कराएगी।
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क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड (फ्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Istock
  • चंदा देने वाले का नाम और डिटेल्स केवल बैंक के पास रहेगी, बॉन्ड पर उसका नाम नहीं होगा।
  • वहीं बैंकइन बॉन्ड पर कोई ब्याज भी नहीं देता है।
  • दिए गए निर्देशों के अनुसार बॉन्ड हर तिमाही की शुरुआत में 10 दिनों तक खरीदे जा सकते हैं।
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